ZINDGI HAI KASAUTI

                        ज़िंदगी है कसौटी



ज़िंदगी है कसौटी

शायर की शायरी, लेखक की कलम,

चित्रकार के रंग, समंदर की लहरें,

पानी की बूँदें, मछली की आँखें,

समंदर का मोती, रेगिस्तान की रेत,

सूरज की धूप में तपती धरती,

फूलों की खुशबू, फूलों पर भँवरे,

भँवरों का गुंजन, गरजते बादल,

बरसता पानी, चाँद की चाँदनी,

सूरज की गर्मी, पंछियों का गीत,

और मेरा संगीत...

कान्हा की मुरली, राधा का प्रेम,

मीरा का समर्पण, सुदामा की दोस्ती,

कान्हा का रास, गोपियों का आनंद,

स्वर्ग का सुख...

साँसों का चलना, साँसों का रुकना,

आँखों का नूर, भीगी हुई पलकें,

लंबी-सी रातें, अधूरे सपने,

चाँद का छिपना, लड़की का शर्माना,

आशिक़ की आशिक़ी, ज़माने का डर,

दोस्त की दोस्ती, दुश्मन की नज़र...

औरत की लाज, टीचर की डाँट,

माँ का प्यार, माँ का आँचल,

माँ की लोरी, माँ की दुआ,

बाबा की फटकार,

बहन का रूठना, भाई का चिढ़ाना,

देवर की मस्ती, भाभी की हँसी,

प्रेमिका का रूठना, पत्नी का प्यार,

चाय की चुस्की, गरम पकोड़ों का साथ,

बच्चे की मुस्कान, इम्तिहान का डर,

गुज़रा हुआ वक़्त, आने वाला कल,

दुल्हन की डोली, किसी और की अर्थी,

किसी की ख़ुशी, किसी के आँसू,

माँ-बाबा का आशीर्वाद,

थोड़ा-सा सुख, थोड़ा-सा दुःख,

थोड़ी हँसी, थोड़ी ख़ामोशी...

यही तो है ज़िंदगी की कसौटी।

जिसे न आप बदल सकते हैं,

न मैं, और न ही कोई दूसरा इंसान।

जिस तरह हम कुदरत के नियम नहीं बदल सकते,

उसी तरह माँ-बाबा के प्रेम, त्याग और बलिदान का कोई विकल्प नहीं हो सकता।

इसलिए जो जैसा है, उसे स्वीकार करना ही जीवन की सबसे बड़ी समझ है।

माँ-बाबा का सम्मान कीजिए,

कुदरत का आदर कीजिए,

और उनके आशीर्वाद के साथ, कुदरत के नियमों के संग कदम से कदम मिलाकर चलिए।

यक़ीन मानिए,

ज़िंदगी की हर कसौटी तब आसान लगने लगेगी।

      Bela...

              
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