समर्पित



        समर्पित
    मेरी सासु माँ 
आदरणीय श्रीमती उषा पुनीवाला जी को

जीवन नामक पुस्तक में से अगर माँ नाम का पन्ना ही न हो तो, 
वह पुस्तक खाली सी लगने लगती है। जैसे किसी के जीवन में 
बचपन से ही सब कुछ हो, मगर सिर्फ माँ ही न हो, तो उसका 
पूरा जीवन कोरे कागज़ की तरह लगता है। 

वैसे ही अगर देखा जाए तो, अगर मेरी ज़िंदगी में माँ जैसी 
मेरी सासु माँ न होतीं तो, मेरे लिए मेरी यह ज़िंदगी कितनी 
मुश्किल होती। कभी-कभी यह सोचती हूँ कि अगर आप मेरे 
साथ न होते, मेरा साथ न देते, तो मैं यह घर और सबको 
कैसे संभालती? आपके बिना मेरे लिए इस परिवार को 
संभालना बहुत मुश्किल हो जाता। 

मेरी ज़िंदगी के हर मुश्किल सफ़र में मेरा साथ देने के 
लिए आपका बहुत-बहुत शुक्रिया। 

"सच बताऊँ तो, शुरू में डर लगता था आपसे, 
लगा था 'सास' मतलब बस रोक-टोक।  
पर आपने धीरे-धीरे वो दीवार गिरा दी।  
आज हाल ये है कि मम्मी से ज़्यादा बातें आपसे Share करती हूँ। 
Thank you मेरी 'Expectations' तोड़ने के लिए माँ।  
ये बुक आपकी बेटी की तरफ से है -
जो कभी बहू बनकर इस घर में आई थी।"

        आपकी बहू नहीं, बेटी
            बेला पुनीवाला

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