दिल की बात
बात वो जो, मैं कहना चाहता हूँ तुमसे,
और वो जो, सुनना चाहती हो तुम हमसे...
दिल की वो बात,
जो आज तक छुपा के रखी थी,
इस दिल में,
कितना चाहने पर भी तुमसे,
कह ना पाए,
दिल की वह बात
अच्छा चलो,
आज तो जो भी हो जाए,
आज तो मन बना लिया है,
की दिल की यह बात
तुम्हारे सामने बयाँ करनी है !
एक वक़्त था, जब
सब की नज़रों से छुपते-छुपाके,
चुपके से देखा करते थे तुमको,
पिछली बेंच पे बैठ के...
तुम्हारे वह रेशमी लहराते हुए,
काले घने लम्बे बाल,
जैसे हर पल मुझे अपनी ओर बुला रहे थे,
तुम्हारे अध-खुले होंठों की वो मुस्कान,
मुझे मदहोश कर जाती थी।
कैसे करेगा कोई भला अपने दिल पे काबू,
जब सामने ताज-महल हो
और हम उसे पाने की सोचे भी नहीं।
ताज-महल तो शाहजहाँ ने बनवाया था,
अपनी मेहबूबा के लिए...
हम शाहजहाँ तो नहीं,
मगर तेरी याद में एक
आशियाना ज़रूर बनाएँगे।
हम ने उसी वक़्त सोच लिया था,
हम पूरी जिंदगी अपने दिल में तुमको,
धड़कन की तरह संभाल कर ज़रूर रखेंगे।
तुम कभी रूठो, मैं तुझे मनाऊँ,
तुम कभी रोओ, मैं तुझे हँसाऊँ...
तेरा साया बनकर, हर पल तेरे साथ रहूँ,
तुम्हारी ज़िंदगी प्यार के रंगों से भर दूँ।
तुम्हारी ज़िंदगी से काँटों को निकालकर,
फूलों सी महकाऊँ...
तुम संभाल नहीं पाओ,
उतना प्यार तुमसे,
सारी उम्र करूँ।
दिल की यह बात,
जो आज तक छुपा के रखी थी,
हमने इस दिल में...
Bela...
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