EK VO WAQT THA

                

एक वो वक़्त था…

एक वो वक़्त था,
जब तुम्हें चुपके-चुपके देख लेना ही मेरी सबसे बड़ी ख़ुशी हुआ करती थी।

एक वो वक़्त था,
जब तुम्हारे पीछे बैठकर तुम्हारे रेशमी बालों को छू लेने भर से पूरा दिन महक उठता था।

एक वो वक़्त था,
जब सिर्फ़ तुम्हारी एक झलक के लिए मैं कैंटीन में घंटों तुम्हारा इंतज़ार किया करता था।

एक वो वक़्त था,
जब तुम्हारे घर तक जाने वाली हर राह मेरी मंज़िल बन जाया करती थी।

एक वो वक़्त था,
जब तुम्हारे नाम रोज़ एक ख़त लिखा करता था,
मगर उसे भेजने की हिम्मत कभी न जुटा पाया,
और हर बार अपने ही हाथों से उसे फाड़ दिया करता था।

एक वो वक़्त था,
जब काग़ज़ पर तुम्हारी तस्वीर बनाते-बनाते जाने कब ख़ुद को भी तुम्हारा बना बैठा था।

एक वो वक़्त था,
जब आँखें बंद करते ही तुम्हारा चेहरा मेरी दुनिया बन जाया करता था।

एक वो वक़्त था,
जब तुम सामने होती थीं,
मगर मेरी ख़ामोशी ही मेरी ज़ुबान बन जाती थी।

एक वो वक़्त था,
जब दिल हर रोज़ तुमसे अपनी मोहब्बत का इज़हार करना चाहता था,
मगर हर बार धड़कनों ने होंठों को ख़ामोश कर दिया।

एक वो वक़्त था,
जब लाइब्रेरी में किताब की ओट से तुम्हें पढ़ते हुए चुपचाप निहारा करता था।

एक वो वक़्त था,
जब तुम्हारी मोहब्बत में ख़ुद को भी भूल जाया करता था।

एक वो वक़्त था…
जो अब सिर्फ़ याद बनकर रह गया है।
न वो रास्ते रहे,
न वो मुलाक़ातें,
न वो इंतज़ार…
मगर तुम्हारे होने का एहसास आज भी मेरी साँसों में ज़िंदा है।

एक वो वक़्त था,
जब तुम्हें डोली में बैठकर किसी और की होती हुई देख रहा था…

और आज…
वो वक़्त है,
जब तुम्हारी अर्थी को देखकर तुम्हें ख़ुदा की होती हुई देख रहा हूँ।

ज़िंदगी ने तुमसे मिलाया भी,
तुमसे जुदा भी किया…
मगर मेरी मोहब्बत न कभी बदली,
न कभी ख़त्म हुई।

क्योंकि कुछ लोग ज़िंदगी से चले जाते हैं,
मगर दिल से कभी नहीं जाते…

             

                                                              Bela... 

                      

                                        

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