बस इतना करना
एक गरीब भक़्त जिसका पति कुछ साल पहले ही मर चूका है। उसका बेटा, अपनी पत्नी और बच्चे को लेकर अपनी माँ को छोड़कर चला गया है। और अब उस गरीब माँ का इस दुनिया में कान्हाजी के अलावा और कोई है भी नहीं, तो वो गरीब अपने कान्हा जी से प्रार्थना करती है, की
" ओ मेरे कान्हाजी,
तेरे सिवा मेरा इस दुनिया में कोई नहीं, तो अब तू ही सुन लेना मेरी पुकार, मुझे मेरे लिए कुछ नहीं चाहिए,
तुझे रोज़ घी का दिया कर सकूँ, इतना घी मेरी झोपड़ी में हो, बस इतना ही तुम मेरे लिए करना,
तुझे रोज़ -रोज़ मक्खन और ख़िर ख़िला सकूँ, उतना दूध और चावल मेरी झोपड़ी में हो, बस इतना ही तुम मेरे लिए करना,
तुझे रोज़ में फूल चढ़ा सकूँ, उतने फूल मेरे आँगन में खिल जाए, बस इतना ही तुम मेरे लिए करना,
अपनी बाँसुरी की सुरीली धुन सुनाकर रोज़ सुबह, तू मुझे जगाया करना, बस इतना ही तुम मेरे लिए करना, तुझे रोज़ सुबह - शाम भोग लगा सकूँ, उतनी सब्जी मेरी झोपड़ी में हो, बस इतना ही तुम मेरे लिए करना,
तेरी मूर्ति बारिश में भीगे ये मुझे पसंद नहीं, तो मेरी टूटी झोपड़ी की छत ठीक हो जाए, बस इतना ही तुम मेरे लिए करना,
तुझे रोज़ नए कपड़े पहना सकूँ, उतना कपड़ा मुझे मिल जाए, बस इतना ही तुम मेरे लिए करना,
मैं जब चाहूँ तेरे मंदिर चल के आ सकूँ, मेरे घुटनो का दर्द ठीक हो जाए, बस इतना ही तुम मेरे लिए करना,
मेरी आँखों को ऐसी रोशनी देना, जिससे की मैं रोज़ बिना चश्मे के भी अच्छे से तेरे दर्शन कर सकूँ, बस इतना ही तुम मेरे लिए करना,
मेरे कान अच्छे से तेरा सत्संग सुन सके, बस इतना ही तुम मेरे लिए करना,
मेरे मुँह से कभी भी अपने बेटे और बहु के लिए बद्दुवा नहीं बल्कि आशीर्वाद ही निकले, तेरे जैसी मधुर वाणी मुझे देना, बस इतना ही तुम मेरे लिए करना,
मैं अपने बेटे को तो अच्छे संस्कार दे ना सकी, मगर तू मेरे पोते को अच्छे संस्कार ज़रुर देना, जिस से की मेरा पोता उसके माँ - बाप को उनके बुढ़ापे में ऐसे अकेला छोड़ के ना चला जाए, बस इतना ही तुम मेरे लिए करना,
तेरे आलावा मेरा अब इस दुनिया में कोई नहीं, तो हो सके तो कभी कभी मुझ गरीब से बातें करने आ जाना, मुझे अच्छा लगेगा, बस इतना ही तुम मेरे लिए करना,
मेरे ह्रदय में और मेरी आँखों में तुम ऐसे बस जाना, की जहाँ तक मेरी नज़र जाए, मुझे बस तू ही तू नज़र आए, बस इतना ही तुम मेरे लिए करना,
मेरे अंत समय तक मेरी तंदुरस्ती ऐसे बनाए ऱखना, जिस से की मैं अच्छे से तेरी सेवा पूजा रोज़ कर सकूँ, तेरे दर्शन को मंदिर जा सकूँ, तेरा सत्संग सुन सकूँ, तुझे मनपसंद मक्खन, खीर और भोग चढ़ा सकूँ, हर पल तेरी भक्ति कर सकूँ, बस इतना ही तुम मेरे लिए करना,
मुझे डरावने चेहरों से डर लगता है, तो मेरे अंत समय में यमराज के बदले तू मुझे लेने आ जाना, ताकि मेरे अंत समय में मुझे तेरे दर्शन हो जाए, बस इतना ही तुम मेरे लिए करना,
मेरे घर में लकड़ी भी दे देना, जिस से की मुझे अंत में जलाने के लिए किसी को लकड़ी ढूंँढने ना जाना पड़े, बस इतना ही तुम मेरे लिए करना,
में बस तुमसे इतना चाहती हूँ, की मेरे मरने के बाद भी मेरा हाथ मत छोड़ना, क्यूंँकि मैंने सुना है, की मरने के बाद परलोक जाते वक़्त रास्ते में बड़े - बड़े राक्षस और पक्षी - प्राणी हमको दंड देते है, तो अगर तुम को ठीक लगे तो उस दंड से बचाने के लिए मेरा हाथ पकड़े रखना और मुझे अपने साथ ले जाना, मैंने जीवन भर तेरी बहोत भक्ति की है, मैंने अपना पूरा जीवन तुमको समर्पित किया है, अब मेरे अंत समय में मेरे लिए तू इतना तो करेगा ही ना ?
बस इतना ही तुम मेरे लिए करना।"
Bela...
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