डर भाग-7
तो दोस्तों, अब तक आप सबने पढ़ा, कि कैसे अजयने अदालत में दिनेश को गुनेगार साबित करके उसे कड़ी से कड़ी सज दिलाई और उसके साथ-साथ सुनीता को भी उसके चेहरे के इलाज के लिए ५ लाख रुपये दिलवाए। अब आगे...
( दूसरे दिन सुबह माया ने धीरे से अपने ही कमरे का दरवाज़ा खोला और चुपके से कमरे के बाहर देख रही थी। लेकिन कमरे के बाहर drawing room में कोई नहीं था। चुपके से वो अपने कमरे से बाहर आकर चारों ओर घूम के इधर-उधर देख कर चलने लगी। घर की सब चीज़ो को अपने हाथ से फ़िर से छू कर महसूस कर रही थी। जैसे, कि वह पहली बार कमरे से बाहर आई हो और पहली बार सब चीज़ छू रही हो। देखते-देखते वो फ़िर से मेज़ पे रखी तस्वीर गौर से देखने लगी। वह तस्वीर उसके और उसके भाई की ही थी, जिस में वो दोनों ज़ोर-ज़ोर से हस्ते हुए, साथ में मस्ती करते हुए नज़र आते थे। वो कुछ देर वही रुकी, जैसे उसे कुछ धुंँधला-धुंँधला सा याद आ रहा हो, जैसे वो और उसका भाई साथ में मस्ती कर रहे थे, एक दूजे के आगे-पीछे भाग रहे थे, वो उसकी चोटी खींच रहा था, दोनों साथ में खाना बना रहे थे और खाना खा भी रहे थे, बारीश में दोनों भीग रहे थे।
( पास्ट में जाते हुए )
( माया कॉलेज के लिए और अजय ऑफिस के लिए निकल रहा था। )
माया : भैया, आज हमारी कॉलेज में फेयरवेल पार्टी है, तो शायद मुझे आने में देर हो जाए, आप मेरा इंतज़ार मत करना और खाना खाके सो जाना।
अजय : आज अदालत में मेरे केस की सुनवाई है तो शायद मुझे भी आते-आते देर हो जाए। मगर तुम अपना ख्याल रखना।
माया : ओके भैया।
अजय : अब चलो मैं तुम्हें कॉलेज छोड़ देता हूँ।
( अजय ने माया को कॉलेज छोड़ा और वो अपने ऑफिस चला गया। )
( माया की दोस्त शबाना, जो बहुत तेज़ दिमाग और लड़ाकू भी थी। मतलब वो दिल की तो अच्छी थी मगर किसी के साथ बुरा होते हुए वो देख नहीं सकती थी। तुरंत सबको बचाने निकल पड़ती थी। कॉलेज में लड़को के साथ भी कभी-कभी उसका पंगा हो ही जाता था। माया ने उसे कितनी बार समझाया की सब से पंगा मत लिया करो, मगर वो कहा किसी की सुनती थी। गरीबो की भी वो बहुत मदद किया करती थी। एक दिन जब वो दोनों कही जा रही थी। तब रास्ते में कुछ गुंडे छोटे बच्चों को परेशान कर के पिट रहे थे। शबाना ने अपने मोबाइल से पुलिस साइरन की आने की रिंग लगाई, सुनते ही सब गुंडे भाग गए, शबाना हसने लगी। डरपोक सब के सब!!!! गरीब और कमज़ोर लोगों पे अपनी ताकत आज़माते रहते है। वो बच्चे भी वहाँ से भाग गए। )
माया : तू भी ना.... चल, अब यहाँ से।
( दोनों वहाँ से निकल जाते है।)
( आज कॉलेज की फेरवेल पार्टी थी। तो सब अपनी मस्ती में थे। सब पार्टी में नाच रहे थे। ऐसे में कुछ दोस्तों को मस्ती सूझती है। वैसे भी सब शराब के नशे में धूत थे।)
लड़के : चलो, आज शबाना और माया के साथ थोड़ी मस्ती हो जाऐ।
( वो दोनों इस बात से अनजान थी।)
उस दिन सब के सामने तो बड़ी उलझ रही थी हमसे, आज देखते है कितनी हिम्मत है उसमें। तो उन लड़कों ने शबाना और माया के ड्रिंक में कुछ मिला दिया। इस बात से अनजान शबाना ने वो ड्रिंक पूरा पी लिया मगर मायाने उसमें से अभी थोड़ा ही पिया था। क्योंकि उसे वो ड्रिंक ज़्यादा पसंद नहीं आया था। थोड़ी ही देर में शबाना को थोड़ा चक्कर सा आने लगा। उस का माथा भी घूम रहा था। उसे कुछ समज में नहीं आ रहा था। उसने माया को कहा मैं वॉशरूम जाके आती हूँ, मेरा इंतज़ार करना।
माया : मैं भी तुम्हारे साथ आती हूँ, तुम्हारी तबियत मुझे कुछ ठीक नहीं लग रही है।
शबाना : फ़िर भी शबाना ने कहा, " मैं ठीक हूँ, मैं अभी जाके आती हूँ। "
माया : अच्छा ठीक है, जल्दी आ जाना।
( शबाना अकेली वॉशरूम के लिए जाने लगती है। बिच में ही उन लड़को ने शबाना का मुँह बंद कर उसे दूसरे कमरे की और ले गए। उसे रस्सी से बांध दिया। ड्रिंक में कुछ मिलाने की वजह से शबाना को चक्कर आ रहे थे। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था, की उसके साथ क्या हो रहा है। वो पूरे होश में नहीं थी।
उधर माया शबाना का इंतज़ार कर रही थी। )
माया : ( मन ही मन सोचा बहुत देर हो गइ शबाना को आने में। मुझे उसकी बड़ी चिंता हो रहीं है। मैं खुद जाकर देखती हूँ, वो कहा रेह गई ) और उसे ढूंँढती हुई वॉशरूम तक जाने लगी तो उसे ज़ोर-ज़ोर से किसी लड़को के बातें करने की और हसने की आवाज़ सुनाई दी। उसे लगा, जैसे किसी के साथ कुछ ग़लत हो रहा हो। ऐसा कुछ सोचकर वो जिस कमरे से आवाज़ आ रही थी उस कमरे तक पहोंची। कमरे का दरवाज़ा तो बंद था। पार्टी में बहुत शोर होने की वजह से किसी और तक शबाना की या उन लड़को की आवाज़ नहीं जा रही थी। वहाँ कमरे के आसपास में सीढ़ी थी, तो माया सीढ़ी पे चढ़कर अंदर देखने लगी। अंदर का माहौल देखकर वो डर ही गई। वो पांच लड़के साथ मिल कर शबाना के साथ बद्तमीज़ी कर रहे थे और अंदर ही अंदर बाते कर रहे थे, कि
लड़का : " बड़ी गर्मी दिखा रही थी उस दिन तो, आज दिखा अपनी गर्मी। चल खड़ी हो। " केह कर उन में से एक ने पानी से भरी बोतल उसके चेहरे पे खाली करते हुए बोला, कि
लड़का : " इसे तो अभी ठीक से होश भी नहीं आया, होश में तो आने दो, फ़िर इसको मज़ा चखाएँगे, इसे भी तो पता चले किसके साथ पंगा लिया था। "
शबाना को अब थोड़ा-थोड़ा होश आने लगा था। उसे मार भी रहे थे और एक के बाद एक उसके कपड़े भी निकाल कर फ़ेंक रहे थे। दूसरे लड़के उसकी फोटो भी खींच रहे थे और वीडियो रिकॉर्डिंग भी कर रहे थे। माया ने बाहर से बहुत आवाज़ लगाई की उसे छोड़ दो। मगर किसी ने ना सुनी। सब शराब के नशे में चूर थे और जैसे सब को शबाना से बदला लेना था। ऐसे ही गुस्से में उसका रेप भी एक के बाद एक सब करने लगे। शबानाने अपने आपको छुड़ाने की बहुत कोशिश की मगर उसे रस्सी से बांधा हुआ था। सो चिल्लाने के अलावा वो कुछ कर न पाई। उन में से एक की नज़र खिड़की से देख रही माया पे पड़ी। उसने दूसरे दोस्त को भी बताया, कि इसका मुँह भी बंद करना पड़ेगा वरना ये बाहर जाके सबको बता देगी। दो लड़के दरवाजा खोल के उसे पकड़ने दौड़े। माया अपने आप को बचाने सीढ़ी से जल्दी से उतरने की वज़ह से गीर जाती है और उसे चोट भी लग जाती है, फ़िर भी वो भागने लगती है। मगर वो लड़के उसे पकड़ ही लेते है और उसे उठा के उसी कमरे में ले जाते है, जहाँ शबाना थी।
माया : ( चिल्लाने लगती है, )
" शबाना को छोड़ दो, हमें जाने दो। " तो वो बोले
लड़के : " ऐसे कैसे जाने दे। " बोलते हुए वो लड़के माया के साथ भी बदतमीज़ी करने लगे। माया इधर-उधर बचने के लिए भागने लगी, चिल्लाने लगी।
माया : " तुम लोगों को पता नहीं है, कि मेरा भाई कौन है ? अगर उसे इन सब बात का पता चला ना, तो आप तो समजो गए। "
लेकिन शराब के नशे में चूर लड़कोने माया की किसी भी बात पे गौर नहीं किया। वो लड़के माया के कपड़े भी फाड़ ने लगे। मगर माया ने ज़ोर से उनको धक्का दे दिया। माया शबाना के पास जाके उसको आवाज़ देने लगी।
माया : शबाना उठो, शबाना उठो। शबाना ने ज़रा आंँख खोल के माया को कहा
शबाना : " तूम भाग जाओ, तुम भाग जाओ। वरना ये लड़के तुम्हें भी नहीं छोड़ेंगे। आज इन सब के सिर पर जुनून सवार है। तुम मेरी परवाह मत करो, तुम भाग जाओ। "
बोलते-बोलते शबाना ने अपनी आंँखे बंद कर दी। माया ज़ोर से चिल्लाती है और शबाना को लिपटकर रोने लगती है। म्यूजिक की वजह से किसी को माया और शबाना के चिल्लाने की आवाज़ सुनाई नहीं दी। उस लड़को ने माया को शबाना से अलग करते हुए बोला की अब तेरी बारी है। माया बहुत जटपटाई। मगर उसकी भी ना सुनी। नशे में सब ने उसके साथ भी वहीं करने की कोशिश की जैसा उन्हों ने शबाना के साथ किया था। मगर अचनाक से पुलिस के आने का साइरन बजा। सब लड़के गभरा गए और माया का मुँह बंद कर दिया ताकि वो और चिल्ला ना सके। छुपते-छुपाते सब माया और शबाना को उठाकर पीछे के दरवाज़े से दोनों को कार में बैठा के वहाँ से भाग ने लगे। माया कुछ ज़्यादा ही चिल्ला रही थी, इसलिए एक लड़के ने माया का मुँह एक कपड़े से ज़ोरो से दबाते हुए बंद कर दिया। ताकि वो चिल्ला ना सके, उस लड़के ने थोड़ी देर तक बहुत ज़ोरो से माया का मुँह कपड़े से दबा रखा था, इसलिए माया की साँस रुकने की वजह से थोड़ी ही देर में माया बेहोश हो जाती है। सब को लगा की वो मर गई, उसके बाद क्या होता है, माया को भी नहीं पता ?
ऐसे में माया अचानक से सच में चीखती है "
माया : शबाना -शबाना
( अजय अचनाक से माया की चीख सुनकर भागा-भागा उसके पास आता है, माया अजय को देखकर उसे गले लगाकर भैया केह कर रो पड़ती है और वो फ़िर से बेहोश हो जाती है। अजय की समझ में कुछ नहीं आता है, वो माया को उठाकर उसके कमरे में सुलाता है और उसका हाथ पकड़कर उसके पास बैठ जाता है और उसे देखता रहता है। )
तो दोस्तों, उसके बाद उन लड़को ने माया के साथ क्या किया ? और अजय को माया अब सब कुछ बता पाऐगी या नहीं ?
अगला भाग क्रमशः ।।
Bela...
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