सब ठीक है!
20 मिनट की हास्य-प्रधान एकांकी
विधा: Comedy Drama
पात्र: 6
स्थान: एक मध्यमवर्गीय परिवार का ड्रॉइंग रूम
पात्र परिचय
रमेश – घर के मुखिया। खुद को बहुत समझदार समझते हैं, लेकिन घर में उनकी कोई नहीं सुनता।
सरला – रमेश की पत्नी। समझदार, तेज़-तर्रार और मज़ेदार जवाब देने वाली।
पिंकी – कॉलेज जाने वाली बेटी। हर समय मोबाइल और सोशल मीडिया में व्यस्त।
सोनू – बेटा। आलसी, खाने और मोबाइल गेम का शौकीन।
दादी – उम्रदराज़ लेकिन सबसे आधुनिक सोच वाली। हर बात में मज़ेदार टिप्पणी।
शर्मा जी – पड़ोसी। बिना बुलाए घर में आने और मुफ्त सलाह देने में विशेषज्ञ।
दृश्य 1
“घर में सब ठीक है!”
(मंच पर ड्रॉइंग रूम। सोफा, सेंटर टेबल और दो कुर्सियाँ। रमेश अखबार पढ़ रहे हैं। सरला घर के काम में व्यस्त है।)
सरला: रमेश जी!
रमेश: हाँ?
सरला: आज सब्ज़ी नहीं है।
रमेश: तो?
सरला: बाजार से ले आइए।
रमेश: अभी?
सरला: नहीं... अगले रविवार को।
(दर्शकों की हँसी)
रमेश: अरे, अभी जाता हूँ।
दादी: रहने दे बहू। इसे भेजोगी तो सब्ज़ी लेने जाएगा और दो घंटे बाद दोस्तों के साथ चाय पीकर आएगा।
रमेश: अम्मा! मैं ऐसा आदमी हूँ?
दादी: बेटा, तू ऐसा आदमी नहीं है।
रमेश: देखा!
दादी: तू उससे भी ज्यादा ऐसा आदमी है।
(हँसी)
(पिंकी मोबाइल देखते हुए आती है।)
पिंकी: मम्मी! मेरा चार्जर कहाँ है?
सरला: अपने कमरे में।
पिंकी: नहीं है।
सरला: तो जहाँ रखा है वहाँ ढूँढो।
पिंकी: मम्मी, आप मेरी माँ हैं या Google?
दादी: Google होती तो कम से कम सही जवाब देती!
(हँसी)
(सोनू जम्हाई लेते हुए आता है।)
सोनू: मम्मी, नाश्ता?
सरला: बना है।
सोनू: क्या?
सरला: जो मिलेगा, वही खाना है।
सोनू: लेकिन मुझे पसंद नहीं है।
दादी: बेटा, जिंदगी में हर चीज़ पसंद की नहीं मिलती।
सोनू: दादी, नाश्ता तो मिल सकता है ना?
दादी: तुझे नाश्ता नहीं, संस्कार चाहिए।
(हँसी)
दृश्य 2
“शर्मा जी की एंट्री”
(दरवाजे पर दस्तक।)
रमेश: कौन?
शर्मा जी: मैं हूँ!
रमेश: कौन मैं?
शर्मा जी: अरे शर्मा!
रमेश: कौन शर्मा?
शर्मा जी: पड़ोसी शर्मा!
दादी: रमेश, दरवाजा खोल दे। वरना शर्मा जी अपना पूरा परिचय देकर ही अंदर आएँगे।
(शर्मा जी प्रवेश करते हैं।)
शर्मा जी: नमस्ते! क्या हाल है?
रमेश: बढ़िया!
सरला: ठीक।
पिंकी: Fine.
सोनू: भूखा।
दादी: परेशान।
शर्मा जी: अरे! एक ही घर में पाँच जवाब?
दादी: क्योंकि एक ही घर में पाँच अलग-अलग समस्याएँ हैं।
(हँसी)
शर्मा जी: अरे छोड़िए। हमारे घर में तो सब बहुत अच्छा है।
दादी: आपकी पत्नी मानती हैं?
शर्मा जी: वो... उनसे पूछकर बताता हूँ।
(हँसी)
दृश्य 3
“सबसे बड़ी मुसीबत”
(पिंकी अचानक मोबाइल देखती है।)
पिंकी: Oh no!
सोनू: क्या हुआ?
पिंकी: Wi-Fi बंद है!
(सभी अचानक गंभीर हो जाते हैं।)
रमेश: क्या?!
सरला: अरे बाप रे!
सोनू: पापा, जल्दी ठीक करवाइए!
रमेश: मैं क्या Wi-Fi कंपनी का मालिक हूँ?
पिंकी: आपने बिल नहीं भरा होगा।
रमेश: मैंने?
सरला: हाँ, आपने।
रमेश: मैंने तो तुम्हें कहा था।
सरला: मैंने आपको कहा था।
रमेश: कब?
सरला: कल।
रमेश: कल तो मैं सो रहा था।
दादी: यही तो दिक्कत है। जिम्मेदारी आते ही तुम्हें नींद आ जाती है।
(हँसी)
सोनू: पापा, मेरा गेम नहीं चल रहा।
रमेश: अच्छा है।
सोनू: क्यों?
रमेश: अब तू इंसानों से बात करेगा।
सोनू: लेकिन घर में इंसान हैं कहाँ?
(सब एक-दूसरे को देखते हैं।)
(हँसी)
दृश्य 4
“बिना Wi-Fi का परिवार”
पिंकी: अब मैं क्या करूँ?
दादी: लोगों से बात कर।
पिंकी: किससे?
दादी: अपने परिवार से।
पिंकी: लेकिन वो लोग करते क्या हैं?
दादी: बेटा, परिवार कोई Instagram Reel नहीं है कि हर समय entertainment देता रहे।
(हँसी)
सोनू: दादी, आपके जमाने में Wi-Fi नहीं था?
दादी: नहीं।
सोनू: फिर आप लोग करते क्या थे?
दादी: बात करते थे।
पिंकी: बिना मोबाइल?
दादी: हाँ।
सोनू: Boring!
दादी: और आज तुम्हारे पास मोबाइल है फिर भी तुम सब परेशान हो।
(हल्की तालियाँ)
दृश्य 5
“असली बात”
(थोड़ा भावुक वातावरण।)
दादी: एक बात पूछूँ?
सब: क्या?
दादी: तुम सब रोज कहते हो—
“सब ठीक है।”
रमेश: तो?
दादी: लेकिन क्या सच में सब ठीक है?
(कुछ पल शांति।)
सरला: सच कहूँ तो... मैं थक जाती हूँ।
रमेश: सरला...
सरला: पूरे घर का काम करते-करते कभी-कभी लगता है कि मुझे भी कोई पूछे—
“तुम कैसी हो?”
रमेश: मुझे पता नहीं था।
सरला: क्योंकि मैंने कभी बताया ही नहीं।
सोनू: और मुझे डर लगता है।
पिंकी: तुझे?
सोनू: हाँ। मुझे डर लगता है कि मैं जिंदगी में कुछ कर नहीं पाया तो सब मुझसे निराश हो जाएँगे।
रमेश: पागल! हमें तेरी नौकरी से ज्यादा तेरी खुशी चाहिए।
(पिंकी धीरे से मोबाइल नीचे रखती है।)
पिंकी: मैं भी खुश नहीं हूँ।
दादी: क्यों?
पिंकी: हर दिन सोशल मीडिया पर दूसरों की जिंदगी देखकर लगता है कि मेरी जिंदगी अच्छी नहीं है।
दादी: बेटा, याद रखना...
(थोड़ा ठहराव)
दादी: सोशल मीडिया पर लोग अपनी जिंदगी का Best Part दिखाते हैं।
अपनी पूरी जिंदगी नहीं।
(तालियाँ)
दृश्य 6
“सब ठीक करने की कोशिश”
रमेश: ठीक है!
सरला: अब क्या?
रमेश: आज से घर में एक नियम होगा।
सोनू: क्या?
रमेश: रोज कम से कम आधा घंटा बिना मोबाइल के सब साथ बैठेंगे।
पिंकी: सच?
रमेश: हाँ।
सोनू: और खाना?
सरला: खाना भी साथ।
सोनू: तो मैं तैयार हूँ।
(हँसी)
दादी: देखो, लड़का परिवार के लिए नहीं, खाने के लिए जुड़ रहा है।
(हँसी)
अंतिम दृश्य
“अब सच में सब ठीक है”
(अचानक पिंकी मोबाइल देखती है।)
पिंकी: Wi-Fi आ गया!
सोनू: Yes!
(दोनों मोबाइल उठाते हैं। फिर रुक जाते हैं।)
पिंकी: आज नहीं।
सोनू: हाँ।
रमेश: क्यों?
पिंकी: क्योंकि आज हमें बात करनी है।
दादी: वाह!
शर्मा जी: तो मैं चलता हूँ।
रमेश: क्यों?
शर्मा जी: घर जाकर अपनी पत्नी से बात करनी है।
दादी: आपको भी?
शर्मा जी: हाँ।
दादी: लगता है आज Wi-Fi बंद होने से बहुत लोगों का दिमाग चालू हो गया।
(जोरदार हँसी)
अंतिम संवाद
(सभी पात्र मंच के आगे आते हैं।)
रमेश: जिंदगी में परेशानी हर किसी के पास है।
सरला: कोई थका हुआ है...
सोनू: कोई डरा हुआ है...
पिंकी: कोई अकेला है...
शर्मा जी: और कोई बिना वजह सलाह दे रहा है।
(सब शर्मा जी को देखते हैं।)
शर्मा जी: क्या है? मैं भी परिवार का हिस्सा हूँ!
(हँसी)
दादी: इसलिए जब कोई आपसे पूछे—
सभी: “सब ठीक है?”
दादी: तो सिर्फ मुस्कुराकर मत कह देना...
सभी मिलकर:
“हाँ, सब ठीक है।”
दादी: पहले खुद से पूछना...
“क्या सच में सब ठीक है?”
(सभी एक-दूसरे का हाथ पकड़ते हैं।)
दादी: क्योंकि कभी-कभी जिंदगी को ठीक करने के लिए Wi-Fi नहीं...
सभी:
एक-दूसरे की जरूरत होती है!
(पर्दा गिरता है।)
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