रिया और रोनित दोनों अपनी पुरानी ट्यूशन की बातें याद करके हँस रहे थे।
रोनित ने मुस्कुराते हुए कहा,
"याद है रिया, हम दोनों पहली बार इसी ट्यूशन में मिले थे?"
रिया हँसते हुए बोली,
"हाँ... और तुम हमेशा मेरी बगल वाली सीट पर बैठने की कोशिश करते थे।"
"मैं? मैं तो पढ़ाई करने आता था।"
"अच्छा! पढ़ाई करने आते थे? फिर मेरी किताब में बार-बार क्यों देखते थे?"
रोनित ने तुरंत सफाई दी,
"तुम्हारी किताब में नहीं देखता था, तुम्हारी लिखावट बहुत अच्छी थी, इसलिए देखता था।"
रिया ने आँखें घुमाईं।
"हाँ, और मेरी लिखावट देखने के लिए तुम हर दिन मेरी नोटबुक माँगते थे!"
दोनों फिर हँस पड़े।
"लेकिन सच बताऊँ?" रोनित ने कहा, "तुम भी कम नहीं थीं।"
"मैंने क्या किया?"
"जब भी मैं तुम्हारी तरफ देखता था, तुम तुरंत अपनी किताब खोलकर पढ़ने लगती थीं।"
रिया हँसते हुए बोली,
"तो क्या करती? पूरी क्लास के सामने तुम्हें देखती रहती?"
"तुम्हें लगता था कि कोई देख नहीं रहा?"
"कौन देख रहा था?"
रोनित ने हँसकर कहा,
"नैना!"
रिया का चेहरा अचानक थोड़ा गंभीर हो गया।
"हाँ... नैना।"
कुछ पल के लिए दोनों चुप हो गए।
फिर रिया ने धीरे से कहा,
"मुझे आज भी याद है, जब भी तुम मुझसे बात करते थे, नैना हमें बहुत ध्यान से देखा करती थी।"
रोनित ने सिर हिलाया।
"हाँ। मुझे भी याद है। लेकिन उस समय मुझे समझ नहीं आता था कि वह इतनी गुस्से में क्यों रहती है।"
रिया ने कहा,
"मुझे तो तब भी समझ आ गया था।"
रोनित ने हैरानी से पूछा,
"तुम्हें?"
"हाँ।"
"फिर तुमने मुझे कभी बताया क्यों नहीं?"
रिया मुस्कुराई।
"क्योंकि मुझे लगा था कि तुम समझदार हो।"
"और मैं?"
"तुम? तुम तो उस उम्र में बिल्कुल बुद्धू थे!"
रोनित ने नकली गुस्से में कहा,
"अच्छा! और तुम बहुत समझदार थीं?"
रिया हँस पड़ी।
"कम से कम तुमसे ज्यादा।"
"अच्छा, इसलिए तुम मुझे रोज चिट्ठियाँ लिखती थीं?"
रिया अचानक चुप हो गई।
रोनित मुस्कुराया।
"अब चुप क्यों हो गईं मैडम?"
रिया ने धीरे से कहा,
"वो चिट्ठियाँ नहीं थीं।"
"तो?"
"बस... छोटी-छोटी बातें थीं।"
"अच्छा! मुझे तो याद है, तुम उन छोटी-छोटी बातों को लिखने के लिए आधा घंटा लगाती थीं।"
रिया ने हँसते हुए कहा,
"क्योंकि तुमसे सामने बोलने की हिम्मत नहीं होती थी।"
रोनित ने तुरंत कहा,
"लेकिन चिट्ठी देने की हिम्मत थी?"
रिया ने उसकी तरफ देखा और मुस्कुरा दी।
"हाँ।"
दोनों कुछ देर तक मुस्कुराते रहे।
फिर रोनित ने कहा,
"लेकिन उन सारी चिट्ठियों में से मुझे एक चिट्ठी आज तक याद है।"
रिया ने पूछा,
"कौन-सी?"
रोनित ने उसकी तरफ देखा।
"वही... जो नैना ने तुमसे छीनकर सर को दे दी थी।"
रिया का चेहरा तुरंत बदल गया।
"वो चिट्ठी?"
"हाँ।"
रिया ने गहरी साँस ली।
"उस दिन को मैं कैसे भूल सकती हूँ?"
रोनित ने धीरे से पूछा,
"तुम्हें आज भी बुरा लगता है?"
रिया कुछ पल चुप रही।
फिर उसने हल्की-सी मुस्कान के साथ कहा,
"बहुत बुरा लगा था। पूरी क्लास के सामने मेरी कितनी बेइज्जती हुई थी।"
रोनित ने कहा,
"लेकिन उस दिन जो हुआ, उसमें एक मजेदार बात भी थी।"
रिया ने उसे देखा।
"क्या?"
रोनित हँस पड़ा।
"जब सर ने कहा था कि हमारी सगाई हो चुकी है, तब नैना का चेहरा देखा था तुमने?"
रिया भी हँसने लगी।
"हाँ... वो तो मैं कभी नहीं भूल सकती।"
"और तुम दोनों के चेहरे देखकर पूरी क्लास हँस रही थी।"
"और तुम?"
"मैं तो चुपचाप बैठा था।"
रिया ने तुरंत कहा,
"झूठ बोल रहे हो। तुम भी हँस रहे थे।"
"अच्छा बाबा, थोड़ा-सा।"
"थोड़ा-सा?"
दोनों फिर हँस पड़े।
कुछ देर बाद रिया ने धीरे से पूछा,
"लेकिन एक बात आज भी समझ नहीं आई।"
"क्या?"
"उस दिन तुम उस चिट्ठी को पढ़कर इतना मुस्कुरा क्यों रहे थे?"
रोनित ने उसकी तरफ देखा।
इस बार उसके चेहरे पर शरारती मुस्कान नहीं थी।
वह कुछ पल चुप रहा।
फिर बोला,
"तुम्हें सच में आज तक नहीं पता?"
रिया ने हैरानी से पूछा,
"क्या नहीं पता?"
रोनित ने मुस्कुराकर कहा,
"उस चिट्ठी में ऐसा क्या लिखा था, जिसकी वजह से मैं मुस्कुरा रहा था।"
रिया ने सिर हिलाया।
"नहीं।"
रोनित थोड़ा आगे झुका।
"तो फिर सुनो..."
रिया ने उत्सुकता से उसकी तरफ देखा।
रोनित ने कहा,
"उस चिट्ठी में तुमने लिखा था..."
और रिया की आँखें अचानक बड़ी हो गईं।
पुरानी चिट्ठी का राज आज, इतने सालों बाद फिर से उनके सामने था।
क्रमशः...
Bela...
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