वो एक चिट्ठी भाग _1

अनकही बातें

वो एक चिट्ठी — भाग 1

शादी के कई साल बीत चुके थे।
रोनित और रिया अब अपने छोटे-से परिवार के साथ खुशहाल जिंदगी जी रहे थे। दोनों की शादी उनकी सोलह साल की उम्र में हुई सगाई का ही खूबसूरत परिणाम थी।
एक दिन रोनित के पुराने दोस्तों ने अपनी स्कूल और ट्यूशन के दिनों के कुछ दोस्तों को एक छोटी-सी पार्टी के लिए बुलाया।
कई साल बाद इतने सारे पुराने चेहरे एक जगह इकट्ठा हुए थे।
कोई अपने बच्चों की बातें कर रहा था, कोई नौकरी की...
तो कोई अपने पुराने दिनों को याद करके हँस रहा था।
रिया भी रोनित के साथ वहाँ पहुँची थी।
जैसे ही उसने कमरें में कदम रखा, उसकी नज़र एक जानी-पहचानी लड़की पर पड़ी।
रिया कुछ पल के लिए वहीं रुक गई।
"नैना?"
सामने खड़ी लड़की ने भी उसे देखा।
कुछ सेकंड तक दोनों एक-दूसरे को पहचानने की कोशिश करती रहीं।
फिर नैना के चेहरे पर पहचान की मुस्कान आ गई।
"रिया!"
दोनों एक-दूसरे से गले मिल गईं।
"हे भगवान! कितने साल हो गए!" नैना ने कहा।
रिया हँसते हुए बोली,
"सच में... लगता है जैसे पूरी जिंदगी निकल गई।"
तभी पीछे से रोनित की आवाज आई,
"अरे, मुझे भी कोई याद करेगा या दोनों पुरानी सहेलियाँ मिलकर मुझे भूल ही गईं?"
नैना ने पीछे मुड़कर रोनित को देखा।
कुछ पल के लिए उसके चेहरे पर एक अजीब-सी खामोशी आई, लेकिन अगले ही पल वह मुस्कुरा दी।
"तुम्हें कौन भूल सकता है, रोनित?"
रोनित हँस पड़ा।
"अच्छा! मुझे तो लगा था तुम मुझे देखते ही रास्ता बदल लोगी।"
नैना ने तुरंत कहा,
"वो तो बहुत साल पहले की बात थी। अब मैं समझदार हो गई हूँ।"
रोनित ने मज़ाक किया,
"अच्छा! ये बात तो तुम्हें उस समय समझनी चाहिए थी।"
रिया ने तुरंत रोनित की तरफ देखा।
"रोनित!"
नैना भी हँस पड़ी।
तीनों कुछ देर तक पुराने दोस्तों के साथ बातें करते रहे।
लेकिन पुरानी यादों का क्या है...
उन्हें किसी बहाने की जरूरत नहीं होती।
बस एक चेहरा सामने आता है...
और इंसान बरसों पीछे पहुँच जाता है।
कुछ देर बाद रोनित ने रिया की तरफ देखा और मुस्कुराते हुए कहा,
"रिया, तुम्हें हमारी पुरानी ट्यूशन याद है?"
रिया ने तुरंत उसकी तरफ देखा।
"ट्यूशन?"
"हाँ।"
रोनित हँसते हुए बोला,
"वही छोटी-सी क्लास... वही लकड़ी की बेंच... और वही तुम्हारी किताब, जिसके पीछे तुम पता नहीं क्या-क्या लिखा करती थीं!"
रिया ने तुरंत उसकी तरफ आँखें तरेरीं।
"तुम्हें आज भी याद है?"
"भूलने वाली बात थी क्या?"
नैना चुपचाप दोनों की बातें सुन रही थी।
रोनित ने हँसते हुए कहा,
"तुम्हें याद है रिया... वो चिट्ठी?"
रिया के चेहरे पर अचानक एक अजीब-सी मुस्कान आ गई।
"कौन-सी चिट्ठी?"
रोनित ने शरारत से कहा,
"अच्छा! अब तुम भूलने का नाटक कर रही हो?"
रिया हँस पड़ी।
"मैंने कुछ नहीं भुलाया।"
और बस...
उस एक छोटी-सी चिट्ठी का नाम आते ही रिया के मन में बरसों पुरानी तस्वीरें फिर से जीवित हो उठीं।
वही सोलह साल की उम्र...
वही ट्यूशन क्लास...
वही लकड़ी की बेंच...
वही ब्लैकबोर्ड...
और वही उम्र, जब पढ़ाई से ज्यादा जरूरी लगता था कि कौन किसे देख रहा है!
रोनित और रिया एक ही ट्यूशन में पढ़ते थे।

रिया और रोनित दोनों अपनी पुरानी ट्यूशन की बातें याद करके हँस रहे थे।

रोनित ने मुस्कुराते हुए कहा,

"याद है रिया, हम दोनों पहली बार इसी ट्यूशन में मिले थे?"

रिया हँसते हुए बोली,

"हाँ... और तुम हमेशा मेरी बगल वाली सीट पर बैठने की कोशिश करते थे।"

"मैं? मैं तो पढ़ाई करने आता था।"

"अच्छा! पढ़ाई करने आते थे? फिर मेरी किताब में बार-बार क्यों देखते थे?"

रोनित ने तुरंत सफाई दी,

"तुम्हारी किताब में नहीं देखता था, तुम्हारी लिखावट बहुत अच्छी थी, इसलिए देखता था।"

रिया ने आँखें घुमाईं।

"हाँ, और मेरी लिखावट देखने के लिए तुम हर दिन मेरी नोटबुक माँगते थे!"

दोनों फिर हँस पड़े।

"लेकिन सच बताऊँ?" रोनित ने कहा, "तुम भी कम नहीं थीं।"

"मैंने क्या किया?"

"जब भी मैं तुम्हारी तरफ देखता था, तुम तुरंत अपनी किताब खोलकर पढ़ने लगती थीं।"

रिया हँसते हुए बोली,

"तो क्या करती? पूरी क्लास के सामने तुम्हें देखती रहती?"

"तुम्हें लगता था कि कोई देख नहीं रहा?"

"कौन देख रहा था?"

रोनित ने हँसकर कहा,

"नैना!"

रिया का चेहरा अचानक थोड़ा गंभीर हो गया।

"हाँ... नैना।"

कुछ पल के लिए दोनों चुप हो गए।

फिर रिया ने धीरे से कहा,

"मुझे आज भी याद है, जब भी तुम मुझसे बात करते थे, नैना हमें बहुत ध्यान से देखा करती थी।"

रोनित ने सिर हिलाया।

"हाँ। मुझे भी याद है। लेकिन उस समय मुझे समझ नहीं आता था कि वह इतनी गुस्से में क्यों रहती है।"

रिया ने कहा,

"मुझे तो तब भी समझ आ गया था।"

रोनित ने हैरानी से पूछा,

"तुम्हें?"

"हाँ।"

"फिर तुमने मुझे कभी बताया क्यों नहीं?"

रिया मुस्कुराई।

"क्योंकि मुझे लगा था कि तुम समझदार हो।"

"और मैं?"

"तुम? तुम तो उस उम्र में बिल्कुल बुद्धू थे!"

रोनित ने नकली गुस्से में कहा,

"अच्छा! और तुम बहुत समझदार थीं?"

रिया हँस पड़ी।

"कम से कम तुमसे ज्यादा।"

"अच्छा, इसलिए तुम मुझे रोज चिट्ठियाँ लिखती थीं?"

रिया अचानक चुप हो गई।

रोनित मुस्कुराया।

"अब चुप क्यों हो गईं मैडम?"

रिया ने धीरे से कहा,

"वो चिट्ठियाँ नहीं थीं।"

"तो?"

"बस... छोटी-छोटी बातें थीं।"

"अच्छा! मुझे तो याद है, तुम उन छोटी-छोटी बातों को लिखने के लिए आधा घंटा लगाती थीं।"

रिया ने हँसते हुए कहा,

"क्योंकि तुमसे सामने बोलने की हिम्मत नहीं होती थी।"

रोनित ने तुरंत कहा,

"लेकिन चिट्ठी देने की हिम्मत थी?"

रिया ने उसकी तरफ देखा और मुस्कुरा दी।

"हाँ।"

दोनों कुछ देर तक मुस्कुराते रहे।

फिर रोनित ने कहा,

"लेकिन उन सारी चिट्ठियों में से मुझे एक चिट्ठी आज तक याद है।"

रिया ने पूछा,

"कौन-सी?"

रोनित ने उसकी तरफ देखा।

"वही... जो नैना ने तुमसे छीनकर सर को दे दी थी।"

रिया का चेहरा तुरंत बदल गया।

"वो चिट्ठी?"

"हाँ।"

रिया ने गहरी साँस ली।

"उस दिन को मैं कैसे भूल सकती हूँ?"

रोनित ने धीरे से पूछा,

"तुम्हें आज भी बुरा लगता है?"

रिया कुछ पल चुप रही।

फिर उसने हल्की-सी मुस्कान के साथ कहा,

"बहुत बुरा लगा था। पूरी क्लास के सामने मेरी कितनी बेइज्जती हुई थी।"

रोनित ने कहा,

"लेकिन उस दिन जो हुआ, उसमें एक मजेदार बात भी थी।"

रिया ने उसे देखा।

"क्या?"

रोनित हँस पड़ा।

"जब सर ने कहा था कि हमारी सगाई हो चुकी है, तब नैना का चेहरा देखा था तुमने?"

रिया भी हँसने लगी।

"हाँ... वो तो मैं कभी नहीं भूल सकती।"

"और तुम दोनों के चेहरे देखकर पूरी क्लास हँस रही थी।"

"और तुम?"

"मैं तो चुपचाप बैठा था।"

रिया ने तुरंत कहा,

"झूठ बोल रहे हो। तुम भी हँस रहे थे।"

"अच्छा बाबा, थोड़ा-सा।"

"थोड़ा-सा?"

दोनों फिर हँस पड़े।

कुछ देर बाद रिया ने धीरे से पूछा,

"लेकिन एक बात आज भी समझ नहीं आई।"

"क्या?"

"उस दिन तुम उस चिट्ठी को पढ़कर इतना मुस्कुरा क्यों रहे थे?"

रोनित ने उसकी तरफ देखा।

इस बार उसके चेहरे पर शरारती मुस्कान नहीं थी।

वह कुछ पल चुप रहा।

फिर बोला,

"तुम्हें सच में आज तक नहीं पता?"

रिया ने हैरानी से पूछा,

"क्या नहीं पता?"

रोनित ने मुस्कुराकर कहा,

"उस चिट्ठी में ऐसा क्या लिखा था, जिसकी वजह से मैं मुस्कुरा रहा था।"

रिया ने सिर हिलाया।

"नहीं।"

रोनित थोड़ा आगे झुका।

"तो फिर सुनो..."

रिया ने उत्सुकता से उसकी तरफ देखा।

रोनित ने कहा,

"उस चिट्ठी में तुमने लिखा था..."

और रिया की आँखें अचानक बड़ी हो गईं।

पुरानी चिट्ठी का राज आज, इतने सालों बाद फिर से उनके सामने था।

क्रमशः...

Bela...





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