एक वादा

अनकही बातें

एक वादा— भाग 1

नैना और समीर की शादी को तक़रीबन चार साल हुए थे और उनकी शादी परिवार की पसंद से ही हुई थी। शुरुआत में दोनों के बीच सब कुछ ठीक था। समीर एक अच्छा पति था, घर की सारी ज़िम्मेदारियाँ निभाता था और नैना की हर छोटी-बड़ी जरूरत का ध्यान रखता था।
लेकिन शादी के दो साल बाद नैना को धीरे-धीरे महसूस होने लगा कि समीर उससे कुछ छुपाने लगा है।
पहले वह देर रात तक ऑफिस में रहने लगा।
फिर अचानक फोन पर पासवर्ड लगाने लगा।
कभी-कभी किसी का फोन आते ही कमरे से बाहर चला जाता।
नैना ने कई बार पूछा भी,
"समीर, सब ठीक है न?"
हर बार उसका एक ही जवाब होता,
"हाँ नैना, सब ठीक है। तुम बेवजह चिंता करती हो।"
नैना भी चुप हो जाती।
वह अपने पति पर शक नहीं करना चाहती थी।
लेकिन एक दिन उसके हाथ में समीर का फोन आ गया।
फोन पर एक महिला का मैसेज था—
"आज आप आएँगे न? मैं आपका इंतज़ार करूँगी।"
नैना की उँगलियाँ काँपने लगीं।
उसने आगे के कुछ मैसेज पढ़े।
उनमें ऐसे शब्द थे, जिन्हें पढ़कर किसी भी पत्नी का दिल टूट सकता था।
नैना की आँखों के सामने अँधेरा छा गया।
उसे समझने में देर नहीं लगी कि समीर की ज़िंदगी में कोई दूसरी औरत थी।
उस रात समीर घर आया तो नैना ने उससे कुछ नहीं पूछा।
वह चाहती तो बहुत बड़ा हंगामा कर सकती थी।
उससे लड़ सकती थी।
अपने मायके फोन कर सकती थी।
लेकिन वह कुछ नहीं कर पाई।
उसके अंदर जैसे सारी ताकत खत्म हो गई थी।
वह सिर्फ़ अपने कमरे में बैठी रही और चुपचाप रोती रही।
अगले दिन भी उसने समीर से कुछ नहीं कहा।
फिर अगले दिन भी नहीं।
नैना के भीतर बहुत कुछ टूट गया था, लेकिन वह अपने टूटे हुए रिश्ते को सबके सामने तमाशा नहीं बनाना चाहती थी।
शायद उसे उम्मीद थी कि समीर खुद एक दिन उसके सामने सच स्वीकार कर लेगा।
लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
समय बीतता गया।
नैना ने समीर से बात करना कम कर दिया।
समीर शायद उसकी खामोशी को उसकी नाराज़गी समझता रहा, लेकिन उसने कभी यह जानने की कोशिश नहीं की कि उसकी पत्नी के भीतर क्या चल रहा है।
एक दिन शाम को समीर ऑफिस से घर आया।
उसके फोन पर किसी का कॉल आया।
समीर फोन लेकर दूसरे कमरे में चला गया।
नैना रसोई में थी, लेकिन घर शांत होने की वजह से उसकी आवाज़ उसे साफ़ सुनाई दे रही थी।
"क्या हुआ?"
दूसरी तरफ से किसी महिला की आवाज़ थी।
समीर की आवाज़ अचानक परेशान हो गई।
"तुम अस्पताल में हो? लेकिन हुआ क्या?"
कुछ पल वह चुप रहा।
फिर बोला,
"ठीक है। मैं आता हूँ। तुम चिंता मत करो।"
नैना के हाथ वहीं रुक गए।
उसका दिल तेज़ी से धड़कने लगा।
अस्पताल...
उसे यकीन हो गया।
वही औरत अस्पताल में थी।
जिसके साथ उसके पति का रिश्ता था।
नैना के मन में कई सवाल उठे।
क्या वह औरत बीमार थी?
क्या समीर उससे मिलने जा रहा था?
क्या उनका रिश्ता इतना गहरा था कि समीर उसकी बीमारी के समय भी उसके साथ खड़ा था?
समीर कुछ देर बाद घर से निकल गया।
नैना दरवाज़े के पास खड़ी उसे जाते हुए देखती रही।
उस रात उसने बहुत सोचा।
फिर अचानक उसने अपना दुपट्टा उठाया और घर से निकल गई।
उसे नहीं पता था कि वह क्या करने जा रही है।
बस इतना पता था कि आज वह उस औरत को अपनी आँखों से देखना चाहती थी।
अस्पताल पहुँचकर उसने रिसेप्शन पर नाम पूछा।
कुछ देर बाद उसे कमरे का नंबर मिल गया।
नैना धीरे-धीरे उस कमरे की तरफ बढ़ी।
उसका दिल इतनी तेज़ी से धड़क रहा था जैसे वह कोई बहुत बड़ा फैसला करने जा रही हो।
दरवाज़ा थोड़ा खुला था।
नैना ने अंदर देखा।
बिस्तर पर एक औरत लेटी थी।
बहुत कमजोर।
चेहरा पीला पड़ चुका था।
उसके हाथ में ड्रिप लगी थी।
पास ही कुछ दवाइयाँ रखी थीं।
वह औरत आँखें बंद किए हुए थी।
नैना कुछ पल दरवाज़े पर खड़ी रही।
फिर उसने धीरे से अंदर कदम रखा।
आवाज़ सुनकर वह औरत ने आँखें खोलीं।
उसने नैना की तरफ देखा।
"आप...?"
नैना कुछ पल चुप रही।
फिर उसने खुद को संभालते हुए कहा,
"मेरा नाम नैना है। मैं समीर की पत्नी हूँ।"
उस औरत के चेहरे पर अचानक हैरानी छा गई।
"समीर की... पत्नी?"
नैना ने सिर हिला दिया।
उसकी आँखों में आँसू आ गए थे।
"हाँ। वही समीर... जिसके साथ आपका रिश्ता है।"
औरत की आँखें फैल गईं।
"आपको गलतफहमी हुई है।"
नैना के चेहरे पर एक कड़वी मुस्कान आ गई।
"मुझे भी यही उम्मीद थी। लेकिन मैंने आपके मैसेज पढ़े हैं।"
वह औरत कुछ देर उसे देखती रही।
फिर उसने बहुत धीमी आवाज़ में कहा,
"आप बैठ जाइए।"
नैना वहीं खड़ी रही।
"मैं सिर्फ़ सच जानने आई हूँ।"
उस औरत ने आँखें बंद कर लीं।
कुछ पल बाद उसकी आँखों के किनारे आँसू आ गए।
"आपको सच जानना है?"
नैना ने सिर हिला दिया।
औरत ने काँपते हुए कहा,
"तो आपको यह भी जानना होगा कि समीर और मेरे बीच वैसा कोई रिश्ता नहीं है, जैसा आप सोच रही हैं।"
नैना के चेहरे पर अविश्वास था।
"फिर कैसा रिश्ता है?"
वह औरत कुछ पल चुप रही।
फिर बोली,
"भाई-बहन का।"
नैना जैसे पत्थर की हो गई।
"क्या?"
"हाँ।"
उस औरत की आँखों से आँसू बहने लगे।
"समीर मेरे पति के सबसे अच्छे दोस्त थे। मेरे पति के जाने के बाद उन्होंने मुझे और मेरे बेटे को अकेला नहीं छोड़ा।"
नैना की साँस जैसे रुक गई।
"आपके पति...?"
"मेरे पति की मौत को कई साल हो चुके हैं।"
उसने कुछ देर आँखें बंद रखीं।
फिर धीमे से बोली,
"मरने से पहले उन्होंने समीर से एक वादा लिया था।"
नैना अब चुपचाप उसकी बातें सुन रही थी।
"उन्होंने कहा था कि अगर उन्हें कुछ हो जाए, तो मेरे दो साल के बेटे को कभी अकेला मत छोड़ना।"
नैना की आँखों में आँसू आ गए।
वह औरत आगे बोली,
"मेरे पति के जाने के बाद समीर ने अपना वादा निभाया। मेरे बेटे की पढ़ाई का खर्च, हॉस्टल की फीस... सब वही देते रहे। मैं बीमार हुई तो मेरे इलाज का पूरा खर्च भी उन्होंने उठाया।"
नैना की आँखें झुक गईं।
वह महिला हल्की-सी मुस्कुराई।
"आपके पति बहुत अच्छे इंसान हैं।"
नैना की आँखों से आँसू गिरने लगे।
लेकिन उसके मन में अभी भी एक सवाल था।
"अगर ऐसा था... तो उन्होंने मुझे कभी बताया क्यों नहीं?"
वह औरत कुछ पल उसे देखती रही।
फिर बोली,
"शायद उन्हें डर था कि आप उन्हें गलत समझेंगी।"
नैना ने आँखें बंद कर लीं।
उसके भीतर जैसे कोई पुराना दर्द जाग उठा।
वह औरत कुछ देर बाद बोली,
"लेकिन अब मुझे अपने लिए कोई चिंता नहीं है।"
नैना ने उसकी तरफ देखा।
उसकी आँखों में डर था।
"मुझे सिर्फ़ अपने बेटे की चिंता है।"
नैना धीरे से उसके पास बैठ गई।
"आपका बेटा कहाँ है?"
"हॉस्टल में। सिर्फ़ दो साल का था जब उसके पिता चले गए थे। मैंने उसे किसी तरह बड़ा किया। लेकिन अब..."
उसकी आवाज़ टूट गई।
"अब मुझे लगता है कि मेरे पास ज़्यादा समय नहीं है।"
नैना का दिल भर आया।
वह महिला कुछ पल चुप रही।
फिर उसने नैना का हाथ पकड़ लिया।
"क्या मैं आपसे एक बात कह सकती हूँ?"
नैना ने उसकी ओर देखा।
उस औरत की आँखों से आँसू बह रहे थे।
"मेरे मरने के बाद... क्या आप मेरे बेटे को अपना लेंगी?"
नैना कुछ बोल नहीं पाई।
"मैं जानती हूँ, यह बहुत बड़ी बात है। लेकिन मैं एक माँ हूँ। मरने से डर नहीं लगता... डर इस बात का है कि मेरे बाद मेरे बच्चे का क्या होगा।"
नैना की आँखों से आँसू बहने लगे।
वह औरत बोली,
"समीर ने मेरे बेटे को हमेशा अपना समझकर उसकी मदद की है। लेकिन मैं चाहती हूँ कि मेरे जाने के बाद उसे सिर्फ़ पैसे और सहारे की नहीं... एक माँ की भी जरूरत होगी।"
नैना ने धीरे से उसका हाथ दबाया।
वह कोई जवाब नहीं दे पाई।
तभी कमरे के बाहर किसी के कदमों की आहट हुई।
नैना ने पीछे मुड़कर देखा।
दरवाज़े के पास समीर खड़ा था।
उसकी आँखों में आँसू थे।
शायद वह बहुत देर से वहाँ खड़ा सब कुछ सुन रहा था।
नैना ने उसकी तरफ देखा।
आज पहली बार उसकी आँखों में गुस्सा नहीं था।
सिर्फ़ एक सवाल था।
समीर धीरे-धीरे कमरे के अंदर आया।
नैना उसके पास गई।
उसने बहुत धीमी आवाज़ में पूछा,
"समीर... तुमने यह सब मुझसे क्यों छुपाया?"
समीर ने अपनी आँखें बंद कर लीं।
उसके पास कोई जवाब नहीं था।
और उस कमरे में...
तीनों के बीच एक ऐसा सच खड़ा था,
जिसने नैना की पूरी ज़िंदगी बदल दी थी।
लेकिन नैना अभी नहीं जानती थी...
कि जिस बच्चे को उसकी ज़िंदगी में आने वाला वह परिवार अपना रहा था,
वह बच्चा एक दिन उसकी ज़िंदगी का सबसे बड़ा सच बन जाएगा।
और वर्षों बाद...
एक पुरानी तस्वीर उस बच्चे को उसके असली माता-पिता की कहानी बताएगी।
क्रमशः...

Bela...

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