अपराध बोध

अनकही बातें

अपराधबोध

हिरेन और हेतवी की शादी को एक साल हो चुका थे। दोनों एक-दूसरे से बेहद प्यार करते थे। अगर उनकी ज़िंदगी में कोई कमी थी, तो बस इतनी कि हिरेन की नौकरी ऐसी थी, जिसमें उसे महीने में कई बार दूसरे शहर जाना पड़ता था। कभी तीन दिन, कभी एक हफ्ता, तो कभी पंद्रह-पंद्रह दिन तक वह घर से दूर रहता।

शुरुआत में हेतवी खुद को समझा लेती थी, लेकिन धीरे-धीरे अकेलापन उसे अंदर ही अंदर खाए जा रहा था।

एक दिन उसने हिरेन से कहा, "दिन भर इस खाली घर में मेरा दम घुटता है। मैं फिर से भरतनाट्यम सीखना चाहती हूँ। शादी से पहले सीखना शुरू किया था, लेकिन पूरा नहीं कर पाई।"

पहले तो हिरेन ने मना कर दिया, लेकिन पत्नी की उदासी देखकर मान गया।

"अगर इससे तुम्हारा मन लग जाएगा, तो मुझे कोई आपत्ति नहीं।"

कुछ ही दिनों बाद घर पर ही डांस की कक्षाएँ शुरू हो गईं। गुरुजी का नाम हितेश था। उम्र में वह हेतवी से कुछ ही साल बड़ा था। स्वभाव से हँसमुख और विनम्र। धीरे-धीरे दोनों के बीच सिर्फ़ गुरु और शिष्या का रिश्ता नहीं रहा, बल्कि एक सहज दोस्ती भी हो गई।

एक शाम तेज़ बारिश होने लगी। इतनी कि सड़कें पानी से भर गईं। हितेश के लिए घर लौटना मुश्किल था।

हेतवी ने कहा, "बारिश रुक जाए, तब तक यहीं रुक जाइए।"

दोनों चाय पीते हुए बातें करने लगे। बातों-बातों में हेतवी ने अपने अकेलेपन का दर्द पहली बार किसी के सामने खुलकर कह दिया।

"कभी-कभी लगता है कि मैं शादीशुदा होकर भी अकेली हूँ।"

हितेश ने उसे समझाने की कोशिश की। लेकिन उस रात भावनाएँ विवेक पर भारी पड़ गईं।

एक पल की कमजोरी ने दोनों से ऐसी गलती करवा दी, जिसका पछतावा उन्हें जीवन भर रहने वाला था।

सुबह होते ही हितेश बिना कुछ कहे चला गया।

कुछ दिनों बाद उसने खुद ही डांस क्लास बंद कर दी। उसने सिर्फ़ एक संदेश भेजा—

"हम दोनों से बहुत बड़ी गलती हुई है। इस गलती को दोहराना नहीं चाहिए। मुझे माफ़ कर दीजिए।"

हेतवी ने भी कभी उससे संपर्क नहीं किया।

लेकिन उस एक रात की याद उसके मन पर हमेशा के लिए बोझ बन गई।

उस रात के दूसरे ही दिन हिरेन छुट्टी लेकर घर आया। हिरेन को हेतवी पर पूरा विश्वास था और उस विश्वास के सामने हेतवी हर दिन टूटती जा रही थी।

करीब एक महीने बाद हेतवी को पता चला, कि वह माँ बनने वाली है।

यह खबर सुनकर हिरेन की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

लेकिन हेतवी की आँखों में खुशी के साथ डर भी था।

शादी से बाद डॉक्टर ने हिरेन के बारे में बताया था, कि उसके पिता बनने की संभावना बहुत कम है। यह बात केवल हेतवी जानती थी, हेतवी हिरेन को दुःख होगा, यह सोचकर यह बात उसने हिरेन से छुपाई थी।

वह चाहती तो उसी दिन सब सच बता सकती थी...लेकिन उसने चुप्पी चुन ली। उसे लगा, शायद यही चुप्पी सबकी ज़िंदगी बचा लेगी।

समय बीतता गया।

एक प्यारे-से बेटे ने जन्म लिया।

उसका नाम रखा गया—आरव।

हिरेन ने कभी उसे अपने बेटे से कम नहीं माना। वह उसके साथ खेलता, उसे स्कूल छोड़ने जाता, उसकी हर छोटी-बड़ी खुशी में शामिल रहता।

लेकिन हेतवी...

जब भी हिरेन प्यार से कहता, "आरव बिल्कुल मेरी तरह दिखता है और मेरी तरह ही मुस्कुराता है।"

तब हेतवी का दिल काँप उठता।

हर मुस्कान उसे अपनी चुप्पी की याद दिला देती।

दस साल बीत गए।

आरव अब चौथी कक्षा में पढ़ता था। हिरेन उसे अपनी जान से भी ज़्यादा चाहता था। स्कूल छोड़ने से लेकर रात को कहानी सुनाकर सुलाने तक, हर छोटी-बड़ी ज़िम्मेदारी वह पूरे मन से निभाता था। उसे कभी इस बात का अहसास तक नहीं हुआ कि आरव उसका अपना बेटा नहीं है।

लेकिन हेतवी...

उसके चेहरे पर मुस्कान ज़रूर रहती थी, मगर भीतर अपराधबोध का एक ऐसा तूफ़ान था, जो हर दिन उसे तोड़ रहा था।

एक रविवार की सुबह हिरेन अलमारी में पुरानी फाइलें देख रहा था। उसे बैंक के कुछ कागज़ चाहिए थे। फाइलें पलटते-पलटते एक पुरानी मेडिकल रिपोर्ट नीचे गिर गई।

उसने झुककर उसे उठाया।

रिपोर्ट पर अपना ही नाम देखकर वह ठिठक गया।

धीरे-धीरे उसने पढ़ना शुरू किया।

"प्राकृतिक रूप से पिता बनने की संभावना अत्यंत कम है..."

कुछ पल के लिए उसकी साँसें जैसे थम गईं।

उसे याद आया... शादी के कुछ समय बाद डॉक्टर के पास दोनों साथ गए थे। लेकिन उसके बाद उसने कभी उस रिपोर्ट के बारे में नहीं पूछा।

उसके हाथ काँपने लगे।

अगर... वह पिता नहीं बन सकता...

तो फिर...

आरव...?

उसी समय हेतवी कमरे में आई।

हिरेन के हाथ में वह रिपोर्ट देखकर उसके कदम वहीं रुक गए। उसके चेहरे का रंग उड़ गया।

दोनों की नज़रें मिलीं।

हिरेन की आँखों में अनगिनत सवाल थे...

और हेतवी की आँखों में दस साल से दबा हुआ सच, कमरें में सन्नाटा फैल गया।

काफी देर बाद हिरेन ने धीमी आवाज़ में पूछा—

"हेतवी... यह सब क्या है?"

अब छिपाने के लिए कुछ बचा ही नहीं था।

हेतवी ने हिम्मत जुटाकर कहना शुरू किया—

"आज जो बताने जा रही हूँ, उसके बाद शायद तुम मुझे कभी माफ़ नहीं करोगे भी या नहीं... लेकिन अब इस बोझ के साथ मैं भी और नहीं जी सकती, मैंने कई बार तुम से यह बात बताने की कोशिश कि मगर कभी कह न पाई, मगर मैं आज इस दर्द, इस बोझ से आज़ाद होना चाहती हूँ।"

फिर उसने उस बरसाती रात से लेकर आज तक की पूरी कहानी सुना दी।

कैसे अकेलापन उसे भीतर ही भीतर खा रहा था...कैसे एक पल की भावनात्मक कमजोरी ने उसकी ज़िंदगी बदल दी...कैसे अगले ही दिन उसने उस रिश्ते को हमेशा के लिए ख़त्म कर दिया...और कैसे पिछले दस साल वह हर दिन अपने ही अपराधबोध की सज़ा भुगतती रही।

सब कुछ सुनने के बाद हिरेन बिल्कुल शांत खड़ा रहा।

उस वक़्त न हिरेन ने कोई गुस्सा किया...

न कोई सवाल पूछा...

न ही कोई आँसू बहाए।

बस उसकी आँखों का विश्वास आज टूट चुका था।

उस रात घर में किसी ने खाना नहीं खाया।

अगले कई दिनों तक दोनों एक ही घर में अजनबियों की तरह रहने लगे।

आरव बार-बार पूछता,

"मम्मी... पापा मुझसे बात क्यों नहीं करते?"

लेकिन किसी के पास कोई जवाब नहीं था। हिरेन के ऐसे बर्ताव से साफ़ पता चलता था, कि वह हेतवी को उस गलती के लिए माफ़ नहीं कर पा रहा है।

एक सुबह हेतवी ने अपना सामान बाँधा।

आरव का हाथ पकड़ा और दरवाज़े तक आ गई।

हिरेन वहीं खड़ा था।

वह चाहता तो उसे रोक सकता था...

लेकिन उसके टूटे हुए विश्वास ने उसके कदमों को बाँध दिया था।

हेतवी ने नम आँखों से हिरेन की ओर देखा।

"मैंने जो किया, उसकी कोई सफ़ाई नहीं है। उस एक पल की भूल की सज़ा मैं पिछले दस साल से हर दिन भुगत रही हूँ। शायद तुम मुझे कभी माफ़ न कर पाओ... और मैं तुम्हें इसके लिए दोष भी नहीं दूँगी।"

वह कुछ पल चुप रही।

"लेकिन जाते-जाते तुमसे एक सवाल पूछना चाहती हूँ..."

"अगर उस रात मेरी जगह तुम होते... और यही गलती तुमसे हुई होती... तो क्या मैं तुम्हें छोड़ देती?"

उसने खुद ही धीमे से कहा—

"शायद नहीं..."

"शायद इसलिए कि बरसों तक औरतों को समझौता करना सिखाया गया। परिवार बचाने के लिए, बच्चों के लिए, समाज के डर से... उन्होंने अपने दर्द को अपने भीतर ही दफना दिया।"

उसकी आँखों से आँसू बह निकले।

"लेकिन जब यही गलती एक औरत से हो जाए... तो उसका अपराध सिर्फ़ उसकी गलती नहीं रह जाता, उसके पूरे चरित्र का फैसला बन जाता है।"

उसने गहरी साँस ली।

"मैं यह नहीं कह रही कि मैं सही हूँ... मैं ग़लत थी, और इसकी सज़ा मैं भुगत रही हूँ। मैं सिर्फ़ इतना पूछ रही हूँ..."

"क्या एक ही गलती की सज़ा औरत और मर्द, दोनों को बराबर मिलती है?"

हिरेन के पास कोई जवाब नहीं था।

उसने बस चुपचाप दरवाज़े को बंद होते देखा...

Bela...




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