एक वादा भाग 3

अनकही बातें

एक वादा — भाग 3

कमरे में गहरी ख़ामोशी थी।

समीर और नैना के सामने उनका बेटा खड़ा था।

उसके हाथ में वही पुरानी तस्वीर थी।

तस्वीर में एक आदमी, एक औरत और उनकी गोद में एक छोटा-सा बच्चा था।

उसने फिर पूछा,

"माँ... पापा... मुझे सच बताइए। ये लोग कौन हैं?"

नैना की आँखों से आँसू बहने लगे।

वह जानती थी कि अब वह दिन आ गया है, जिसका डर उसे वर्षों से सताता था।

समीर ने धीरे से कहा,

"बेटा, बैठ जाओ।"

"नहीं पापा। पहले मुझे बताइए।"

उसकी आवाज़ में बेचैनी थी।

समीर ने नैना की ओर देखा।

नैना ने धीरे से सिर हिला दिया।

समीर ने गहरी साँस ली।

"जिस आदमी को तुम तस्वीर में देख रहे हो... वह तुम्हारे असली पिता थे।"

बेटे के चेहरे का रंग उड़ गया।

"क्या?"

नैना ने उसका हाथ पकड़ने की कोशिश की, लेकिन उसने अपना हाथ पीछे कर लिया।

"और यह औरत..."

समीर की आवाज़ भर्रा गई।

"तुम्हारी माँ।"

कमरे में जैसे समय रुक गया।

वह लड़का, जो इतने वर्षों से नैना और समीर को ही अपना माँ-बाप मानता आया था, आज अचानक उसे पता चला था कि उसकी कहानी उनसे शुरू नहीं हुई थी।

उसकी आँखों में आँसू आ गए।

"तो... मैं आपका बेटा नहीं हूँ?"

नैना का दिल टूट गया।

वह तुरंत उसके पास गई।

"तुम हमारे बेटे हो। इसमें कभी कोई शक मत करना।"

"लेकिन आपने मुझसे इतना बड़ा सच क्यों छुपाया?"

समीर ने उसकी ओर देखा।

"क्योंकि जब तुम बहुत छोटे थे, तब तुम्हारे माता-पिता इस दुनिया में नहीं रहे। तुम सिर्फ़ दो साल के थे। तुम्हारी माँ बहुत बीमार थीं और उन्हें अपनी मौत का अंदाज़ा हो गया था। उन्होंने हमसे सिर्फ़ एक बात कही थी..."

समीर की आँखों में आँसू आ गए।

"उन्होंने कहा था कि उनके बाद तुम्हें कभी अकेला मत छोड़ना।"

बेटा चुपचाप सुनता रहा।

नैना ने कहा,

"हमने तुम्हें सच इसलिए नहीं बताया क्योंकि तुम बहुत छोटे थे। हम नहीं चाहते थे कि तुम्हारे मन पर यह बोझ पड़े कि तुम्हारे असली माँ-बाप अब इस दुनिया में नहीं हैं। हम चाहते थे कि तुम्हारा बचपन किसी डर या दुख के साथ नहीं, बल्कि प्यार के साथ बीते।"

"लेकिन बाद में क्यों नहीं बताया?"

इस बार नैना के पास कोई जवाब नहीं था।

समीर ने कहा,

"क्योंकि तब तक तुम हमें अपना माँ-बाप मान चुके थे। तुम हमें छोड़कर जाने की बात सोच भी नहीं सकते थे। हमें डर था कि सच जानकर कहीं तुम्हें ऐसा न लगे कि हमने तुम्हें धोखा दिया।"

बेटे की आँखों से आँसू बहने लगे।

"आप दोनों ने मुझे धोखा नहीं दिया..."

वह धीरे से बोला।

"आप दोनों ने तो मुझे मेरी पूरी ज़िंदगी दी है।"

नैना की आँखें भर आईं।

उसने बेटे को गले लगा लिया।

कुछ देर तक तीनों एक-दूसरे से लिपटकर रोते रहे।

थोड़ी देर बाद बेटे ने तस्वीर को देखा।

"माँ... मेरी असली माँ कैसी थीं?"

नैना मुस्कुराई।

"बहुत अच्छी थीं।"

"आप उन्हें जानती थीं?"

नैना ने सिर हिला दिया।

"हाँ।"

फिर उसने उसे सारी कहानी बताई।

उसने बताया कि कैसे उसकी माँ ने अस्पताल में उससे अपने बेटे को अपनाने की विनती की थी।

कैसे उसके पिता ने मरने से पहले समीर से एक वादा लिया था।

कैसे समीर ने वर्षों तक उस वादे को निभाया।

और कैसे उसकी माँ अपनी आख़िरी साँस तक सिर्फ़ अपने बेटे की चिंता करती रही।

बेटा तस्वीर को सीने से लगाकर रोने लगा।

"उन्होंने मुझे छोड़ना नहीं चाहा था..."

नैना ने उसके सिर पर हाथ रखा।

"नहीं बेटा। उन्होंने तुम्हें छोड़ा नहीं था। उन्हें मजबूरी में जाना पड़ा।"

उस दिन उसे पहली बार अपनी जन्म देने वाली माँ के लिए एक अजीब-सा अपनापन महसूस हुआ।

एक ऐसी माँ...

जिसे उसने कभी देखा तक नहीं था।

लेकिन जिसने मरते समय भी सिर्फ़ उसके बारे में सोचा था।

फिर उसने समीर की तरफ देखा।

"पापा..."

समीर ने उसकी ओर देखा।

"आपने अपना वादा निभाया।"

समीर की आँखें भर आईं।

"मैंने सिर्फ़ एक दोस्त से किया हुआ वादा निभाया था।"

बेटे ने सिर हिलाया।

"नहीं पापा। आपने सिर्फ़ उनका वादा नहीं निभाया। आपने मुझे जिंदगी दी है।"

फिर वह नैना के पास आया।

उसने अपनी माँ के पैर छुए।

नैना ने उसे तुरंत उठाकर गले लगा लिया।

"मुझे माफ़ कर दो माँ।"

"किस बात के लिए?"

"मैंने कभी नहीं सोचा कि आप दोनों ने मेरे लिए कितना कुछ किया है। मैं हमेशा यही समझता रहा कि आप मेरे माँ-बाप हैं... लेकिन आज समझ आया कि आपने मुझे सिर्फ़ जन्म नहीं दिया, आपने मुझे जिंदगी दी है।"

नैना ने उसके चेहरे को अपने हाथों में थाम लिया।

"बेटा, तुम्हें हमने पाला नहीं है... तुमने हमें भी तो माँ-बाप बनाया है।"

वह मुस्कुराया।

फिर उसने तस्वीर को ध्यान से देखा।

"मैं इसे संभालकर रखूँगा।"

समीर ने पूछा,

"क्यों?"

वह मुस्कुराया।

"क्योंकि यह मेरे जन्म की कहानी है।"

फिर उसने नैना और समीर की ओर देखा।

"और आप दोनों... मेरी जिंदगी की कहानी हैं।"

उस दिन के बाद उस घर में एक और तस्वीर लगाई गई।

एक तरफ़ उसके जन्म देने वाले माता-पिता की पुरानी तस्वीर थी।

और उसके ठीक बगल में नैना और समीर की तस्वीर।

चार लोग...

एक कहानी।

एक ने उसे जन्म दिया था।

दो ने उसे जीवन दिया था।

और एक छोटा-सा वादा...

जिसने तीन ज़िंदगियों को हमेशा के लिए जोड़ दिया था।

कभी-कभी रिश्ते सिर्फ़ खून से नहीं बनते।

कुछ रिश्ते...

एक वादे से बनते हैं।

और कुछ अनकही बातें...

सालों बाद भी किसी पुरानी तस्वीर के पीछे छुपी रहती हैं।

समाप्त।

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