अनकही बातें
वो एक चिट्ठी — भाग 2
रोनित ने रिया की आँखों में देखते हुए धीरे से कहा,
"उस चिट्ठी में तुमने लिखा था..."
वह अचानक रुक गया।
रिया की उत्सुकता और बढ़ गई।
"क्या लिखा था मैंने?"
रोनित मुस्कुराया।
"तुमने लिखा था—
'रोनित, मुझे नहीं पता कि तुम मुझे पसंद करते हो या नहीं... लेकिन मुझे तुम बहुत अच्छे लगते हो। शायद मैं तुम्हें पसंद करने लगी हूँ।'"
रिया का चेहरा शर्म से लाल हो गया।
"तुम्हें ये सब आज भी याद है?"
रोनित हँसते हुए बोला,
"चिट्ठी के शब्द आज भी याद हैं।"
रिया कुछ पल चुप रही।
फिर उसने धीरे से पूछा,
"लेकिन... तुम मुस्कुरा क्यों रहे थे?"
रोनित ने उसकी तरफ देखा।
"क्योंकि चिट्ठी पढ़कर मुझे पहली बार पता चला था कि तुम भी मुझे पसंद करती हो।"
रिया ने हैरानी से पूछा,
"तो तुम्हें पहले से नहीं पता था?"
"नहीं।"
"लेकिन तुम तो हमेशा मेरी तरफ देखते रहते थे।"
"वो इसलिए कि मैं तुम्हें पसंद करता था।"
रिया कुछ कह नहीं पाई।
रोनित ने मुस्कुराते हुए कहा,
"लेकिन तुम इतनी चुप रहती थीं कि मुझे कभी यकीन ही नहीं हुआ कि तुम्हारे दिल में भी मेरे लिए कुछ है।"
रिया ने हल्की आवाज़ में कहा,
"तो फिर तुमने कभी बताया क्यों नहीं?"
रोनित कुछ पल चुप रहा।
"डर लगता था।"
"तुम्हें?"
"हाँ, मुझे भी डर लगता था।"
रिया हँस पड़ी।
"उस उम्र में भी?"
"उस उम्र में ही तो सबसे ज्यादा डर लगता था।"
दोनों एक-दूसरे को देखकर मुस्कुराने लगे।
तभी रिया की नजर कुछ दूर खड़ी नैना पर पड़ी।
नैना चुपचाप उनकी तरफ देख रही थी।
रिया की मुस्कान अचानक धीमी पड़ गई।
रोनित ने भी उसकी नजर का पीछा किया।
नैना ने जैसे ही दोनों को अपनी तरफ देखते हुए देखा, वह तुरंत दूसरी तरफ मुड़ गई।
रिया ने धीरे से कहा,
"रोनित..."
"हम्म?"
"तुम्हें लगता है नैना को उस चिट्ठी के बारे में सब पता था?"
रोनित ने कुछ सोचते हुए कहा,
"शायद।"
"और उसने वो चिट्ठी सर को क्यों दी थी?"
रोनित ने रिया की तरफ देखा।
"तुम्हें आज तक नहीं पता?"
रिया ने सिर हिलाया।
"नहीं। उस दिन तो मैं इतना रोई थी कि किसी से कुछ पूछ ही नहीं पाई।"
रोनित कुछ पल चुप रहा।
फिर उसने कहा,
"मुझे लगता है... अब तुम्हें नैना से पूछना चाहिए।"
रिया ने आश्चर्य से उसकी तरफ देखा।
"अभी?"
"हाँ।"
"इतने साल बाद?"
रोनित ने मुस्कुराकर कहा,
"कुछ सवालों के जवाब जितनी देर से मिलें, उतना ही अच्छा होता है।"
रिया कुछ कहती, उससे पहले नैना उनके पास आ गई।
उसके चेहरे पर वही पुरानी मुस्कान थी, लेकिन आँखों में कुछ छिपा हुआ था।
"क्या बातें हो रही हैं?"
रिया ने सीधे उससे पूछा,
"नैना, तुमसे एक बात पूछूँ?"
नैना का चेहरा थोड़ा गंभीर हो गया।
"हाँ, पूछो।"
"तुम्हें वो चिट्ठी याद है?"
नैना कुछ पल के लिए बिल्कुल शांत हो गई।
उसके चेहरे से मुस्कान गायब हो गई।
"कौन-सी चिट्ठी?"
रिया ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा,
"वही चिट्ठी... जो तुमने मुझसे छीनकर सर को दे दी थी।"
नैना ने गहरी साँस ली।
"तुम्हें अब भी याद है?"
रिया ने हल्की मुस्कान के साथ कहा,
"भूलने वाली बात थी क्या?"
नैना ने कुछ नहीं कहा।
रिया ने फिर पूछा,
"तुमने ऐसा क्यों किया था?"
नैना ने नजरें झुका लीं।
काफी देर तक वह कुछ नहीं बोली।
फिर धीरे से बोली,
"क्योंकि मैं तुमसे जलती थी।"
रिया चुप रह गई।
रोनित भी नैना की तरफ देखने लगा।
नैना ने आगे कहा,
"मैं रोनित को पसंद करती थी। बहुत पहले से।"
रिया के चेहरे पर कोई हैरानी नहीं थी।
शायद वह यह बात पहले से जानती थी।
नैना की आवाज़ थोड़ी भर्रा गई।
"मैंने कभी रोनित को बताया नहीं। मुझे लगता था कि एक दिन वह खुद समझ जाएगा। लेकिन फिर तुम दोनों..."
वह रुक गई।
"तुम दोनों को साथ देखकर मुझे बहुत बुरा लगता था।"
रिया ने धीरे से पूछा,
"इसलिए तुमने मेरी चिट्ठी सर को दे दी?"
नैना ने सिर झुका लिया।
"हाँ।"
"तुम जानती थीं कि मेरी कितनी बेइज्जती होगी?"
"हाँ।"
"फिर भी?"
नैना की आँखों में आँसू आ गए।
"उस उम्र में मैं बहुत स्वार्थी थी, रिया। मुझे बस यही लगता था कि अगर तुम दोनों के बीच कुछ नहीं होगा, तो शायद रोनित कभी मुझे देखेगा।"
रिया कुछ पल उसे देखती रही।
फिर उसने धीरे से कहा,
"लेकिन उस दिन जब सर ने चिट्ठी सबके सामने पढ़ी थी, मुझे बहुत बुरा लगा था।"
"मुझे पता है।"
"तुमने कभी मुझसे माफी भी नहीं माँगी।"
नैना की आँखों से एक आँसू गिर पड़ा।
"क्योंकि मेरे अंदर हिम्मत नहीं थी।"
रिया चुप रही।
नैना ने रिया का हाथ पकड़ लिया।
"मुझे माफ कर दो।"
कुछ पल तक दोनों के बीच सिर्फ खामोशी थी।
फिर रिया ने धीरे से उसका हाथ दबाया।
"नैना, वो बात बहुत पुरानी हो चुकी है।"
"लेकिन मेरे लिए नहीं।"
रिया ने उसकी तरफ देखा।
नैना बोली,
"मैंने उस दिन तुम्हारी चिट्ठी तो छीन ली थी, लेकिन तुम्हारी जिंदगी नहीं छीन पाई।"
रोनित हल्का-सा मुस्कुरा दिया।
"क्योंकि हमारी सगाई पहले ही हो चुकी थी।"
नैना ने रोनित की तरफ देखा।
"हाँ। और उस दिन पहली बार मुझे समझ आया था कि मैं कितनी गलत थी।"
रिया ने पूछा,
"उस दिन?"
नैना ने सिर हिलाया।
"जब सर ने कहा था कि तुम दोनों की सगाई हो चुकी है।"
रिया चुपचाप उसे देखती रही।
नैना ने आगे कहा,
"उस दिन मैं पूरी क्लास के सामने बहुत शर्मिंदा हुई थी। लेकिन उससे भी ज्यादा शर्मिंदगी मुझे अपने आप से हुई थी।"
"क्यों?"
"क्योंकि मुझे समझ आ गया था कि रोनित तुम्हारा है... और तुम उसकी।"
रिया की आँखें नम हो गईं।
नैना ने मुस्कुराने की कोशिश की।
"लेकिन एक बात बताऊँ?"
"क्या?"
"उस चिट्ठी ने मुझे एक बात जरूर सिखाई।"
"क्या?"
"किसी को पाने की चाह में किसी अपने को दुख नहीं देना चाहिए।"
रिया ने उसकी तरफ देखा।
फिर दोनों एक-दूसरे से गले मिल गईं।
कुछ दूर खड़ा रोनित दोनों को देख रहा था।
उसके चेहरे पर संतोष था।
इतने सालों से उनके बीच जो एक पुरानी बात अनकही थी, शायद आज वह भी पूरी हो गई थी।
तभी रिया अचानक अलग हुई।
उसने रोनित की तरफ देखा।
"एक मिनट..."
रोनित ने पूछा,
"अब क्या हुआ?"
रिया ने मुस्कुराते हुए कहा,
"तुमने मुझे पूरी चिट्ठी तो सुनाई ही नहीं।"
रोनित के चेहरे पर अचानक शरारती मुस्कान आ गई।
"अरे हाँ!"
रिया ने कहा,
"क्या लिखा था आगे?"
रोनित ने सिर हिलाया।
"वो तो मैं तुम्हें नहीं बताऊँगा।"
"क्यों?"
"क्योंकि वो चिट्ठी सिर्फ मेरे लिए थी।"
रिया ने आँखें तरेरीं।
"रोनित!"
रोनित हँसते हुए वहाँ से थोड़ा दूर जाने लगा।
रिया भी उसके पीछे भागी।
"रुको! मुझे पूरी चिट्ठी सुननी है।"
नैना उन्हें देखकर हँस पड़ी।
लेकिन रोनित अचानक रुक गया।
उसने अपनी जेब से अपना फोन निकाला।
"एक मिनट।"
रिया ने पूछा,
"क्या हुआ?"
रोनित ने फोन में कुछ ढूँढ़ना शुरू किया।
फिर उसने एक तस्वीर रिया के सामने कर दी।
रिया की आँखें अचानक फैल गईं।
स्क्रीन पर वही पुरानी चिट्ठी थी।
रिया ने हैरानी से पूछा,
"ये तुम्हारे पास कैसे है?"
रोनित मुस्कुराया।
"क्योंकि सर ने चिट्ठी पढ़ने के बाद मुझे वापस दे दी थी।"
रिया ने धीरे से फोन अपने हाथ में लिया।
वह चिट्ठी पढ़ने लगी।
कुछ पल बाद उसकी आँखों में आँसू आ गए।
उसने रोनित की तरफ देखा।
"तुमने इसे इतने सालों तक संभालकर रखा?"
रोनित ने मुस्कुराकर कहा,
"तुम्हारी पहली चिट्ठी थी। कैसे फेंक देता?"
रिया ने चिट्ठी फिर से पढ़ी।
आखिरी पंक्तियों पर पहुँचकर वह अचानक रुक गई।
उसने रोनित की तरफ देखा।
"तुमने मुझे ये कभी बताया क्यों नहीं?"
रोनित ने धीरे से पूछा,
"क्या?"
रिया की आँखों में आँसू थे, लेकिन चेहरे पर मुस्कान।
"चिट्ठी के आखिर में मैंने क्या लिखा था... तुम्हें याद है?"
रोनित ने कहा,
"हाँ।"
"तो फिर तुमने इतने साल मुझसे ये बात क्यों छिपाई?"
रोनित ने मुस्कुराकर कहा,
"क्योंकि मैं चाहता था कि एक दिन तुम खुद मुझसे पूछो।"
रिया ने धीरे से पूछा,
"और आज?"
रोनित ने उसका हाथ पकड़ लिया।
"आज वो दिन आ गया।"
रिया ने मुस्कुराते हुए कहा,
"तो बताओ... मैंने आखिर में क्या लिखा था?"
रोनित ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा,
"अगर हमारी सगाई पहले से नहीं हुई होती... तो क्या तुम मुझसे शादी करते?"
रिया की आँखों से आँसू बह निकले।
रोनित ने उसका हाथ अपने हाथों में थाम लिया।
"और मेरा जवाब उस दिन भी वही था... जो आज है।"
रिया ने पूछा,
"क्या?"
रोनित मुस्कुराया।
"हाँ।"
रिया हँसते हुए रोने लगी।
नैना भी उन्हें देखकर मुस्कुरा रही थी।
कभी-कभी जिंदगी में कुछ बातें बहुत छोटी उम्र में लिखी जाती हैं...
लेकिन उनका जवाब पूरी जिंदगी साथ चलता है।
एक छोटी-सी चिट्ठी...
जिसे लिखते समय रिया सिर्फ सोलह साल की थी।
एक चिट्ठी...
जिसे नैना ने गुस्से में छीन लिया था।
एक चिट्ठी...
जिसे रोनित ने बरसों संभालकर रखा।
और एक चिट्ठी...
जिसने तीन लोगों के बीच छिपे एक पुराने सच को इतने सालों बाद सामने ला दिया।
रिया ने रोनित के कंधे पर सिर रख दिया।
रोनित ने धीरे से कहा,
"रिया..."
"हम्म?"
"एक बात पूछूँ?"
"पूछो।"
"अगर उस दिन हमारी सगाई नहीं हुई होती... तो क्या तुम सच में मुझसे शादी करती?"
रिया ने उसकी तरफ देखा।
फिर मुस्कुराकर बोली,
"पता नहीं..."
रोनित ने नकली गुस्से में कहा,
"क्या मतलब पता नहीं?"
रिया हँस पड़ी।
"शायद..."
"शायद?"
"हाँ।"
"क्यों?"
रिया ने उसका हाथ थामते हुए कहा,
"क्योंकि शायद मुझे तुम्हें एक और चिट्ठी लिखनी पड़ती।"
दोनों हँस पड़े।
और नैना उन्हें देखकर सोचने लगी—
कुछ चिट्ठियाँ सिर्फ शब्द नहीं होतीं...
वे किसी के दिल का वो सच होती हैं, जिसे कहने की हिम्मत इंसान के पास पूरी जिंदगी नहीं होती।
समाप्त।
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