zindgi ek kitab



मेरी नज़र से देखो तो,
ज़िन्दगी भी जैसे
एक किताब ही तो है, 
जैसे किताब के पन्ने पलटने से,
कहानी बदलती है,
वैसे ही ज़िन्दगी के दिन बदलने से,
तकदीर बदलती है।
और
जैसे किताब का हर बदलता पन्ना,
एक नया एहसास, एक नई उम्मीद,
एक नई कहानी,
अपने साथ लेकर आता है, 
वैसे ही
ज़िन्दगी का हर नया दिन
अपने साथ जीने की,
 एक नई वजह लेकर आता है। 

Bela....

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