इंतज़ार
*कश्मकश के बाद अब इंतज़ार की बारी है,*
*हर घड़ी तेरे आने की उम्मीद जारी है।*
*दरवाज़े पे टिकी निगाहें थक सी गई हैं,*
*पर दिल अब भी कहता है - वो आएगा ज़रूर।
घड़ी की सुईयाँ भी मुझसे सवाल करती हैं,
कब तक यूं ही पलकें बिछाए बैठोगी?
मैं बस मुस्कुरा कर कह देती हूँ,
मोहब्बत की घड़ी में वक़्त नहीं देखा करते।
लोग कहते हैं सब्र का फल मीठा होता है,
पर कोई ये नहीं बताता कि सब्र कितना कड़वा होता है।
फिर भी तेरे एक दीदार की ख़ातिर,
मैं हर कड़वाहट पीने को तैयार हूँ।
बस एक इल्तिजा है इस इंतज़ार से,
जब तू आए, तो आने की आहट दे देना,
कहीं ऐसा ना हो कि इंतज़ार करते-करते,
मैं इंतज़ार करना ही भूल जाऊँ।
Bela...
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