एक अधूरी दास्तान
तेरी मेरी प्रेम कहानी
एक प्रेम कहानी,
जो शुरू होने से पहले,
ही खत्म हो गई...
दो दिल थे,
जो एक दूसरे के लिए धड़कते थे,
आँखों ही आँखों में सारी बातें हो जाती थीं,
पर लबों तक इकरार कभी आ ना सका।
लड़की मजबूर थी, लड़का नासमझ था।
जब तक एहसास को अल्फाज़ मिले,
ज़िंदगी हाथों से रेत की तरह,
फिसल चुकी थी,
इज़हार ए इश्क़ का,
वक़्त भी निकल चुका था,
मगर फ़िर भी अब भी,
दिल में एक आशा की
किरण बची हुई थी, कि
शायद वह मिल जाए,
और हम तुम एक हो जाए,
मगर यह हो ना सका,
वक़्त को शायद इस जन्म,
हमारा साथ होना,
मंज़ूर नहीं था,
या इस जन्म हमारा साथ,
लिखा ही नहीं था,
ऐसा सोचकर,
इस दिल को सिर्फ मना रहे है,
इस जन्म नहीं, तो उस जन्म
हमें तुम्हारा इंतजार रहेगा,
हर जन्म।
ये कहानी है हर उस शख्स की,
जिसने मोहब्बत को महसूस तो किया,
पर सही वक़्त पर कह नहीं पाए।
" मिले थे हम, पर मिल ना सके,
चाहा था तुमको, पर कह ना सके।
वो नज़रें जो सब कह देती थीं,
वो खामोशी जो सब समझ लेती थी।
पर 'मोहब्बत' का एक लफ्ज़,
जुबां पर आ ना सका,
वो मजबूर थी, मैं नासमझ था,
और जब समझ आया...
तब तक बहुत देर हो चुकी थी,
'इज़हार से पहले' -
एक ऐसी दास्तान,
जो हर टूटे दिल की होती है।"
*बेला पुनीवाला* रिश्तों के एहसासों को शब्द देने में माहिर हैं। 'इम्तिहान', 'मैं कौन हूँ?' और 'कहानी घर घर की, कहानी हर घर की ' के बाद अब वो 'अधूरी मोहब्बत' की दास्तान लेकर आई हैं। उनका मानना है कि कुछ कहानियां मुकम्मल नहीं होतीं, पर हमेशा याद रहती हैं।
...अधूरी मोहब्बत की दास्तान...
⭐ "कभी लिखते-लिखते, तो कभी पढ़ते-पढ़ते आँखें नम हो ही जाती है।"
Bela...
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